Friday, 4 September 2026

मृदा का कणीय आकार वितरण (Particle Size Distribution) ज्ञात करने की छलनी विश्लेषण विधि

शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)

सिविल इंजीनियरिंग विभाग — मृदा यांत्रिकी प्रयोगशाला (Soil Mechanics Laboratory)

मृदा का कणीय आकार वितरण (Particle Size Distribution) ज्ञात करने की छलनी विश्लेषण विधि

(Sieve Analysis Method — IS : 2720 (Part 4) – 1985, Reaffirmed)

1. उद्देश्य (Aim)

भारतीय मानक कोड IS : 2720 (Part 4) – 1985 "Methods of Test for Soils — Grain Size Analysis" के अनुसार, छलनी विश्लेषण विधि (Sieve Analysis) द्वारा मृदा के कणीय आकार वितरण (Particle Size Distribution) ज्ञात करना तथा कणीय आकार वितरण वक्र (Grading Curve) आलेखित करना।

2. सिद्धांत (Principle)

मृदा-प्रतिदर्श को क्रमशः घटते हुए छिद्र-आकार (mesh size) की छलनियों की एक श्रृंखला (nest) से गुजारा जाता है। प्रत्येक छलनी पर रुके हुए (retained) मृदा-कणों का भार ज्ञात कर, कुल प्रतिदर्श भार के सापेक्ष प्रत्येक छलनी पर रुकी मृदा का प्रतिशत तथा संचयी रूप से गुजरने वाली (percentage finer) मृदा का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है। इन मानों को अर्ध-लघुगणकीय (semi-log) ग्राफ पर आलेखित कर कणीय आकार वितरण वक्र (grading curve) प्राप्त होता है, जो मृदा के वर्गीकरण व अभियांत्रिकी गुणों के आकलन हेतु उपयोग होता है।

4.75 mm छलनी पर रुकने वाले स्थूल अंश (coarse fraction) हेतु शुष्क छलनी विश्लेषण (Dry Sieving) तथा 4.75 mm से गुजरने व 75 माइक्रोन पर रुकने वाले महीन अंश (fine fraction) हेतु आर्द्र छलनी विश्लेषण (Wet Sieving) प्रयुक्त होता है, विशेषकर जब मृदा-कण मृत्तिका/गाद से लिपटे (coated) हों।

3. उपकरण (Apparatus)

    IS छलनियों का समूह (Nest of IS Sieves) —

    स्थूल छलनियां (Coarse Sieves): 100 mm, 75 mm, 19 mm, 10 mm, 4.75 mm।

    महीन छलनियां (Fine Sieves): 2 mm, 1 mm, 600 माइक्रोन, 425 माइक्रोन, 300 माइक्रोन, 212 माइक्रोन, 150 माइक्रोन, 75 माइक्रोन।

    यांत्रिक छलनी शेकर (Mechanical Sieve Shaker) — छलनियों को समान रूप से हिलाने हेतु।

    तापस्थायी नियंत्रित ओवन (Oven) — 105°C से 115°C।

    तौल-यंत्र/तुला (Balance) — प्रतिदर्श भार के 0.1% तक संवेदनशीलता सहित।

    मोर्टार व रबर मूसल (Mortar with Rubber Pestle) — मृदा-ढेलों को तोड़ने हेतु (कणों को न तोड़ें)।

    ब्रश, ट्रे, वुडन मैलेट (लकड़ी का हथौड़ा)।

    आर्द्र छलनी हेतु — परिक्षेपक अभिकर्मक (Dispersing Agent): सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट (2 g/लीटर जल) अथवा सोडियम हाइड्रॉक्साइड + सोडियम कार्बोनेट (1 g + 1 g प्रति लीटर जल)।

4. प्रतिदर्श की मात्रा (Quantity of Specimen)

प्रतिदर्श की न्यूनतम मात्रा मृदा में उपस्थित कणों के अधिकतम आकार पर निर्भर करती है, जो निम्नानुसार है —

कणों का अधिकतम आकार (mm)

प्रतिदर्श की न्यूनतम मात्रा

75

60 kg

40

25 kg

25

13 kg

20

6.5 kg

12.5

3.25 kg

10

1.6 kg

6.3

0.5 kg

4.75 अथवा उससे छोटा

0.2 kg (200 g)

5. प्रयोग विधि (Procedure)

भाग-अ: प्रतिदर्श की तैयारी (Sample Preparation)

1.        क्षेत्र से प्राप्त मृदा-प्रतिदर्श को वायु अथवा धूप में सुखाएं; यदि ढेले (clods) हों तो उन्हें लकड़ी के मैलेट व रबर मूसल की सहायता से सावधानीपूर्वक तोड़ें, ताकि व्यक्तिगत कण न टूटें।

2.        प्रतिदर्श को 110 ± 5°C ताप पर ओवन में स्थिर भार (constant mass) प्राप्त होने तक शुष्क करें।

3.        क्वार्टरिंग विधि (Quartering Method) द्वारा प्रतिनिधि (representative) प्रतिदर्श पृथक करें तथा उपरोक्त तालिका अनुसार आवश्यक मात्रा तौलें, इसे W अंकित करें (कुल प्रतिदर्श भार)।

भाग-ब: स्थूल छलनी विश्लेषण (Coarse/Dry Sieve Analysis — 4.75 mm व उससे बड़े कणों हेतु)

4.        आवश्यक छलनियों (100, 75, 19, 10, 4.75 mm) को साफ करें तथा घटते क्रम (सबसे बड़ी सबसे ऊपर) में एक के ऊपर एक रखकर स्टैक बनाएं, सबसे नीचे पैन (pan) रखें।

5.        शुष्क प्रतिदर्श को सबसे ऊपरी छलनी में डालें तथा ढक्कन लगाएं।

6.        स्टैक को यांत्रिक शेकर पर रखकर कम-से-कम 10 मिनट तक हिलाएं। (सत्यापन हेतु: अतिरिक्त 1 मिनट हाथ से हिलाने पर किसी भी छलनी से 1% से अधिक अतिरिक्त सामग्री न गुजरे, तभी छलनाई पूर्ण मानी जाएगी।)

7.        प्रत्येक छलनी पर रुकी हुई मृदा को सावधानीपूर्वक अलग कर तौलें तथा अंकित करें।

भाग-स: महीन छलनी विश्लेषण (Fine/Wet Sieve Analysis — 4.75 mm से गुजरा व 75 माइक्रोन पर रुका अंश हेतु)

8.        शुष्क प्रतिदर्श (जो 4.75 mm से गुजरा हो) को एक ट्रे में लेकर जल में भिगोएं तथा परिक्षेपक अभिकर्मक (dispersing agent) मिलाकर 10–12 घंटे भीगने दें।

9.        भीगे हुए प्रतिदर्श को 4.75 mm छलनी पर जल की सहायता से धोएं, जब तक साफ जल न निकलने लगे। 4.75 mm पर रुके अंश को 24 घंटे ओवन में शुष्क कर वापस स्थूल विश्लेषण में जोड़ें।

10.     4.75 mm से गुजरे अंश को 75 माइक्रोन छलनी पर धोकर, महीन मृदा-कणों (silt/clay) को जल के साथ बहा दें, तथा 75 माइक्रोन पर रुके अंश को ओवन में शुष्क करें।

11.     इस शुष्क अंश को महीन छलनियों (2 mm, 1 mm, 600μ, 425μ, 300μ, 212μ, 150μ, 75μ) के स्टैक में डालकर, यांत्रिक शेकर पर कम-से-कम 10 मिनट तक हिलाएं।

12.     प्रत्येक छलनी पर रुकी मृदा को अलग कर तौलें तथा अंकित करें। 75 माइक्रोन से गुजरा अंश (silt व clay) पैन में एकत्रित होता है।

6. गणना — सूत्र (Calculation — Formula)

प्रत्येक छलनी पर रुकी मृदा का प्रतिशत = (उस छलनी पर रुका भार / कुल प्रतिदर्श भार W) × 100

संचयी रुका प्रतिशत (Cumulative % Retained) = उस छलनी तक के सभी प्रतिशतों का योग

प्रतिशत गुजरा/फाइनर (% Finer) = 100 − संचयी रुका प्रतिशत

7. प्रेक्षण सारणी (Observation Table — प्रयोगशाला हेतु प्रारूप)

कुल प्रतिदर्श भार, W = _______ g

IS छलनी आकार

रुकी मृदा का भार (g)

रुका प्रतिशत (%)

संचयी रुका प्रतिशत (%)

गुजरा/फाइनर प्रतिशत (%)

10 mm

 

 

 

 

4.75 mm

 

 

 

 

2.36 mm

 

 

 

 

1.18 mm

 

 

 

 

600 माइक्रोन

 

 

 

 

425 माइक्रोन

 

 

 

 

300 माइक्रोन

 

 

 

 

150 माइक्रोन

 

 

 

 

75 माइक्रोन

 

 

 

 

पैन (Pan)

 

8. कणीय आकार वितरण वक्र (Grading Curve — Graph)

प्राप्त आंकड़ों को अर्ध-लघुगणकीय ग्राफ (semi-log graph) पर आलेखित किया जाता है — X-अक्ष (लघुगणकीय पैमाना) पर कणों का आकार D (mm), तथा Y-अक्ष (सामान्य पैमाना) पर गुजरा प्रतिशत (Percentage Finer, 0 से 100 तक)। नीचे उदाहरण-स्वरूप एक विशिष्ट (typical) कणीय आकार वितरण वक्र प्रदर्शित है —




(उपरोक्त ग्राफ केवल उदाहरण-स्वरूप है — वास्तविक प्रयोग में छात्र अपने प्रेक्षण सारणी के आंकड़ों से स्वयं वक्र आलेखित करेंगे।)

9. वक्र से गुणांकों की गणना (Coefficients from Grading Curve)

वक्र से 10%, 30% व 60% फाइनर के संगत कणीय व्यास ज्ञात किए जाते हैं, जिन्हें क्रमशः D₁₀, D₃₀ व D₆₀ कहते हैं (D₁₀ को "प्रभावी आकार"/Effective Size भी कहा जाता है)।

एकरूपता गुणांक (Uniformity Coefficient), Cu = D₆₀ / D₁₀

वक्रता गुणांक (Coefficient of Curvature), Cc = (D₃₀)² / (D₆₀ × D₁₀)

गणना का उदाहरण (Solved Example — ऊपर दिए ग्राफ के आधार पर)

वक्र से प्राप्त: D₁₀ = 0.175 mm, D₃₀ = 0.404 mm, D₆₀ = 1.035 mm

Cu = 1.035 / 0.175 = 5.91

Cc = (0.404)² / (1.035 × 0.175) = 0.90

10. मृदा वर्गीकरण मानदंड (Classification Criteria based on Cu & Cc)

मृदा

सुश्रेणित (Well-Graded) हेतु शर्त

कुश्रेणित (Poorly-Graded)

बजरी/कंकड़ (Gravel, GW)

Cu > 4 तथा Cc, 1 से 3 के मध्य

उपरोक्त शर्त पूर्ण न हो तो GP

बालू (Sand, SW)

Cu > 6 तथा Cc, 1 से 3 के मध्य

उपरोक्त शर्त पूर्ण न हो तो SP

उपरोक्त उदाहरण में Cu = 5.91 (>4 परंतु सामान्यतः बालू हेतु आवश्यक >6 से कम) तथा Cc = 0.90 (1–3 की परास से बाहर) है — अतः यह मृदा कुश्रेणित (poorly-graded, SP प्रकार के निकट) मानी जाएगी। वास्तविक वर्गीकरण हेतु IS 1498 अनुसार पूर्ण विश्लेषण आवश्यक है।

11. सावधानियां (Precautions)

    मोर्टार-मूसल से ढेले तोड़ते समय मृदा-कणों को स्वयं न तोड़ें, केवल आपस में चिपके कणों को पृथक करें।

    प्रत्येक छलनी को उपयोग से पूर्व व पश्चात भली-भांति साफ करें, ताकि कोई कण फंसा न रह जाए (विशेषकर महीन छलनियों में)।

    यांत्रिक शेकर पर छलनाई की अवधि (न्यूनतम 10 मिनट) व तीव्रता (amplitude) निर्माता के निर्देशानुसार बनाए रखें।

    प्रत्येक छलनी पर रुकी मृदा को तौलते समय कोई भी कण हानि न हो, यह सुनिश्चित करें — कुल रुके भार का योग प्रारंभिक प्रतिदर्श भार के निकटतम (1% विचलन के भीतर) होना चाहिए।

    आर्द्र छलनी विश्लेषण में जल-अपवाह के साथ महीन मृदा-कण (silt/clay) की हानि सामान्य है — इसका भार पैन में गुजरे अंश के रूप में गणना में सम्मिलित किया जाता है।

    मृत्तिका-लिपटे (clay-coated) मृदा-कणों हेतु शुष्क छलनी विश्लेषण के स्थान पर आर्द्र छलनी विश्लेषण अनिवार्य है, अन्यथा परिणाम अशुद्ध होंगे।

12. सिविल इंजीनियरिंग में महत्व (Engineering Significance)

    मृदा वर्गीकरण (Soil Classification — USCS/IS 1498) की मूल आधारशिला — कणीय आकार वितरण के आधार पर मृदा को बजरी, बालू, गाद, मृत्तिका आदि में वर्गीकृत किया जाता है।

    सुश्रेणित (well-graded) मृदा प्रॉक्टर संहनन में उच्चतर शुष्क घनत्व प्राप्त करती है — अतः तटबंध, सड़क आधार व भरण (fill) सामग्री चयन में उपयोगी।

    पारगम्यता (permeability), निकास (drainage) व फिल्टर डिजाइन (filter design) — बांधों व भूमिगत जल निकास प्रणालियों में उपयुक्त फिल्टर सामग्री के चयन हेतु आवश्यक।

    ग्रेनुलर सब-बेस (GSB), वेट मिक्स मैकाडम (WMM) जैसी सड़क निर्माण सामग्री की गुणवत्ता व MoRTH/IRC विनिर्देशों (grading envelope) से अनुपालन की जांच।

    संकेंद्रित फुटिंग व नींव अभिकल्पन हेतु मृदा के अपरूपण सामर्थ्य (shear strength) व संपीडनशीलता (compressibility) के प्रारंभिक अनुमान में सहायक।

अभ्यास हेतु प्रश्न: (1) IS 2720 (Part 4) के अनुसार छलनी विश्लेषण द्वारा कणीय आकार वितरण ज्ञात करने की संपूर्ण विधि (शुष्क व आर्द्र दोनों) सचित्र वर्णन कीजिए। (2) कणीय आकार वितरण वक्र किस प्रकार आलेखित किया जाता है? D₁₀, D₃₀, D₆₀ की परिभाषा दीजिए। (3) एकरूपता गुणांक (Cu) व वक्रता गुणांक (Cc) के सूत्र लिखिए तथा इनका महत्व समझाइए। (4) यदि D₁₀ = 0.2 mm, D₃₀ = 0.5 mm, D₆₀ = 1.2 mm हो, तो Cu व Cc ज्ञात कीजिए तथा मृदा सुश्रेणित है अथवा नहीं, बताइए। (5) सिविल इंजीनियरिंग में कणीय आकार वितरण के व्यावहारिक उपयोग पर टिप्पणी लिखिए। 

मृदा की द्रव सीमा (Liquid Limit) ज्ञात करने की कासाग्रांडे उपकरण विधि

 

शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)

सिविल इंजीनियरिंग विभाग — मृदा यांत्रिकी प्रयोगशाला (Soil Mechanics Laboratory)

मृदा की तरलता सीमा (Liquid Limit) ज्ञात करने की कासाग्रांडे उपकरण विधि

(Casagrande Apparatus Method — IS : 2720 (Part 5) – 1985, Reaffirmed)

1. उद्देश्य (Aim)

भारतीय मानक कोड IS : 2720 (Part 5) – 1985 "Methods of Test for Soils — Determination of Liquid and Plastic Limit" के अनुसार, कासाग्रांडे उपकरण (Casagrande Apparatus) की सहायता से मृदा की तरलता सीमा (Liquid Limit, LL) ज्ञात करना।

2. परिभाषा (Definition)

तरलता सीमा (Liquid Limit) वह न्यूनतम जल-अंश है जिस पर मृदा प्लास्टिक अवस्था (plastic state) से तरल अवस्था (liquid state) में परिवर्तित हो जाती है — अर्थात मृदा इतनी तरल हो जाती है कि मानक विधि से लगाए गए झटकों (blows) से खांचा (groove) बंद हो जाता है, फिर भी मृदा में अल्प अपरूपण सामर्थ्य (small shear strength) शेष रहती है।

तरलता सीमा, अटरबर्ग सीमाओं (Atterberg Limits — तरलता सीमा, प्लास्टिकता सीमा, संकुचन सीमा) में से एक है, जो सूक्ष्म-दानेदार (fine-grained) मृदाओं के वर्गीकरण व अभियांत्रिकी व्यवहार के आकलन हेतु मूल आधार है।

3. उपकरण (Apparatus)

    कासाग्रांडे तरलता सीमा उपकरण (Casagrande Liquid Limit Device) — IS: 9259-1979 के अनुरूप, पीतल के कप (brass cup), क्रेंक व कैम तंत्र (crank & cam mechanism) सहित, जो कप को निश्चित ऊंचाई (10 mm) से गिराता है।

    खांचा उपकरण (Grooving Tool) — दो प्रकार: (i) मानक/कासाग्रांडे खांचा उपकरण — मृत्तिकायुक्त (clayey) मृदा हेतु, खांचा: तल पर 2 mm चौड़ा, ऊपर 11 mm चौड़ा, 8 mm गहरा। (ii) ASTM खांचा उपकरण — बलुई (sandy) मृदा हेतु, खांचा: तल पर 2 mm चौड़ा, ऊपर 13.6 mm चौड़ा, 10 mm गहरा।

    तौल-यंत्र/तुला (Balance) — क्षमता 500 g, संवेदनशीलता 0.01 g।

    तापस्थायी नियंत्रित ओवन (Oven) — क्षमता 250°C तक (परीक्षण हेतु 105°C–110°C प्रयुक्त)।

    चीनी मिट्टी की वाष्पन तश्तरी (Porcelain Evaporating Dish) — लगभग 12–15 cm व्यास।

    नमनीय खुरपी/स्पैचुला (Flexible Spatula) — फलक लंबाई ≈8 cm, चौड़ाई ≈2 cm।

    पैलेट नाइफ (Palette Knife) — फलक लंबाई ≈20 cm, चौड़ाई ≈3 cm।

    425 माइक्रोन IS छलनी, वॉश बॉटल, वायुरोधी पात्र (जल-अंश निर्धारण हेतु)।

4. प्रतिदर्श की तैयारी (Sample Preparation)

1.        क्षेत्र से प्राप्त मृदा-प्रतिदर्श को वायु में सुखाएं; ढेले हों तो लकड़ी के मैलेट से तोड़ें तथा जड़ें/कार्बनिक पदार्थ हटा दें।

2.        लगभग 120 g वायु-शुष्क मृदा — जो 425 माइक्रोन IS छलनी से गुजरी हो — भली-भांति मिश्रित भाग से प्राप्त करें।

3.        इस मृदा को वाष्पन तश्तरी में लेकर आसुत जल के साथ मिलाकर एकसमान लेई (uniform paste) बनाएं। तैयार पेस्ट को वायुरोधी पात्र में लगभग 24 घंटे परिपक्व (mature/soak) होने दें, ताकि नमी संपूर्ण मृदा में समान रूप से वितरित हो जाए।

5. प्रयोग विधि (Procedure)

1.        कासाग्रांडे उपकरण को समतल दृढ़ आधार पर रखें तथा खांचा उपकरण की गेज (gauge) से जांच लें कि कप ठीक 10 mm (1 cm) की ऊंचाई से गिरता है, आवश्यकतानुसार समायोजित करें।

2.        तैयार पेस्ट का एक भाग कप में रखें तथा स्पैचुला से कुछ स्ट्रोक में समतल फैलाएं, जिससे अधिकतम मोटाई के बिंदु पर गहराई 1 cm हो जाए; अतिरिक्त मृदा वापस तश्तरी में डाल दें।

3.        खांचा उपकरण से कप के केंद्र से होकर, फॉलोअर की केंद्र-रेखा के अनुदिश, दृढ़ स्ट्रोक द्वारा एक स्पष्ट व नुकीला खांचा (groove) बनाएं, ताकि खांचे का आकार व माप उचित बना रहे।

4.        क्रेंक को लगभग 2 चक्कर प्रति सेकंड की दर से घुमाकर कप को बारंबार गिराएं, जब तक खांचे के दोनों भाग केवल प्रवाह (flow) द्वारा लगभग 12 mm लंबाई तक परस्पर स्पर्श न कर लें।

5.        खांचा बंद होने हेतु आवश्यक झटकों (blows) की संख्या (N) अंकित करें।

6.        खांचे के बंद हुए भाग के समीप से एक प्रातिनिधिक भाग लेकर उसका जल-अंश (w%) IS 2720 (Part II) की ओवन शुष्कन विधि से ज्ञात करें।

7.        कप की शेष मृदा को तश्तरी में वापस डालकर, थोड़ा और जल मिलाकर मिश्रण को अधिक तरल बनाएं (अथवा शुष्क कर कम तरल बनाएं), तथा प्रक्रिया दोहराएं।

8.        इस प्रकार भिन्न-भिन्न जल-अंशों पर परीक्षण दोहराकर न्यूनतम 4 से 5 प्रेक्षण प्राप्त करें, इस प्रकार कि झटकों की संख्या 15 से 35 के मध्य वितरित हो (एक भी प्रेक्षण 15 से कम अथवा 35 से अधिक न हो)।

परीक्षण सदैव अधिक शुष्क (अधिक झटकों वाली) अवस्था से आरंभ कर क्रमशः अधिक तरल (कम झटकों वाली) अवस्था की ओर बढ़ाया जाना चाहिए — इससे समय व श्रम की बचत होती है।

6. प्रेक्षण सारणी (Observation Table — प्रयोगशाला हेतु प्रारूप)

क्र.

विवरण (Description)

प्रे. 1

प्रे. 2

प्रे. 3

प्रे. 4

1

पात्र क्रमांक

 

 

 

 

2

झटकों की संख्या, N

 

 

 

 

3

खाली पात्र (ढक्कन सहित) का भार, W₁ (g)

 

 

 

 

4

पात्र + गीली मृदा का भार, W₂ (g)

 

 

 

 

5

पात्र + शुष्क मृदा का भार, W₃ (g)

 

 

 

 

6

जल का भार = (W₂ − W₃) (g)

 

 

 

 

7

शुष्क मृदा का भार = (W₃ − W₁) (g)

 

 

 

 

8

जल-अंश, w (%) = [(W₂−W₃)/(W₃−W₁)]×100

 

 

 

 

7. प्रवाह वक्र (Flow Curve — Graph)

प्राप्त आंकड़ों (N व w) को अर्ध-लघुगणकीय ग्राफ (semi-log graph) पर आलेखित किया जाता है — X-अक्ष (लघुगणकीय पैमाना) पर झटकों की संख्या (N), तथा Y-अक्ष (सामान्य पैमाना) पर जल-अंश (w%)। प्राप्त बिंदुओं से यथासंभव सीधी रेखा (best-fit straight line) खींची जाती है, जिसे "प्रवाह वक्र" (Flow Curve) कहते हैं। N = 25 के संगत जल-अंश ही मृदा की तरलता सीमा (LL) है।

गणना का उदाहरण (Solved Example — ऊपर दिए ग्राफ के आधार पर)

झटकों की संख्या, N

जल-अंश, w (%)

15

42

20

38

28

33

35

30

 

उपरोक्त बिंदुओं से खींचे गए प्रवाह वक्र से, N = 25 के संगत जल-अंश प्राप्त होता है:

तरलता सीमा, LL = 34.7% (निकटतम प्रथम दशमलव तक रिपोर्ट)

8. एक-बिंदु विधि (One-Point Method — वैकल्पिक त्वरित विधि)

यदि समय सीमित हो, तो कासाग्रांडे के अनुभवजन्य सूत्र से केवल एक प्रेक्षण (जो 20 से 30 झटकों के मध्य हो) से भी तरलता सीमा का अनुमानित मान ज्ञात किया जा सकता है — परंतु इसे मानक (चार-बिंदु) विधि का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, केवल त्वरित सत्यापन हेतु उपयोगी है।

LL = w × (N/25)^0.121

जहां — w = परीक्षण में प्राप्त जल-अंश (%), N = उस परीक्षण में झटकों की संख्या।

9. परिणाम की रिपोर्टिंग (Reporting of Result)

    N = 25 के संगत जल-अंश को निकटतम पूर्णांक अथवा प्रथम दशमलव तक रिपोर्ट किया जाता है, जो मृदा की तरलता सीमा (LL) कहलाती है।

    प्रवाह वक्र न्यूनतम चार बिंदुओं से होकर यथासंभव सीधी रेखा के रूप में खींचा जाना चाहिए।

10. सावधानियां (Precautions)

    परीक्षण के दौरान कासाग्रांडे उपकरण को समतल व दृढ़ सतह पर रखें, कंपन से बचाएं।

    प्रत्येक परीक्षण से पूर्व कप व खांचा उपकरण की गिरने की ऊंचाई (10 mm) गेज से जांच लें।

    खांचा एक ही दृढ़ स्ट्रोक में बनाएं — बार-बार खांचा उपकरण चलाने से खांचे का आकार बिगड़ सकता है।

    क्रेंक को स्थिर गति (2 चक्कर/सेकंड) से घुमाएं — अनियमित गति से गलत झटका-गणना होगी।

    झटकों की संख्या 15 से कम अथवा 35 से अधिक होने पर वह प्रेक्षण प्रवाह वक्र हेतु स्वीकार्य नहीं है, प्रयोग दोहराएं।

    जल-अंश निर्धारण हेतु प्रतिदर्श खांचे के ठीक बंद हुए भाग के निकट से ही लें।

    परीक्षण सदैव शुष्क (अधिक N) से तरल (कम N) की ओर क्रमबद्ध रूप से करें, ताकि पेस्ट में क्रमिक रूप से जल मिलाना पड़े, न कि सुखाना।

    बलुई मृदा (जिसमें पर्याप्त मृत्तिका न हो) हेतु ASTM खांचा उपकरण का उपयोग करें, मानक कासाग्रांडे उपकरण का नहीं।

11. सिविल इंजीनियरिंग में महत्व (Engineering Significance)

    मृदा वर्गीकरण (IS 1498 / USCS) — तरलता सीमा (LL) व प्लास्टिकता सीमा (PL) से प्राप्त प्लास्टिसिटी इंडेक्स (PI = LL − PL) के आधार पर प्लास्टिसिटी चार्ट पर मृदा को CL, CI, CH आदि वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है।

    नींव अभिकल्पन — उच्च तरलता सीमा वाली मृदाएं (जैसे मृत्तिका) सामान्यतः अधिक संपीडनशील (compressible) व कम भार वहन क्षमता वाली होती हैं, अतः विशेष नींव अभिकल्पन आवश्यक होता है।

    तटबंध, सड़क उप-आधार व बांध निर्माण हेतु मृदा की उपयुक्तता के प्रारंभिक आकलन में सहायक।

    संगति सूचकांक (Consistency Index) व द्रवता सूचकांक (Liquidity Index) की गणना — क्षेत्र में मृदा की प्राकृतिक अवस्था (दृढ़, मृदु, तरल) के आकलन हेतु।

    सूजन क्षमता (swelling potential) व संकुचन (shrinkage) के प्रारंभिक अनुमान हेतु उपयोगी संकेतक।

अभ्यास हेतु प्रश्न: (1) IS 2720 (Part 5) के अनुसार कासाग्रांडे उपकरण द्वारा मृदा की तरलता सीमा ज्ञात करने की संपूर्ण विधि सचित्र वर्णन कीजिए। (2) प्रवाह वक्र (flow curve) कैसे आलेखित किया जाता है तथा इससे तरलता सीमा कैसे ज्ञात की जाती है? (3) कासाग्रांडे खांचा उपकरण व ASTM खांचा उपकरण में क्या अंतर है, तथा प्रत्येक कहां उपयुक्त है? (4) एक-बिंदु विधि (One-Point Method) का सूत्र लिखिए तथा इसकी सीमाएं बताइए। (5) सिविल इंजीनियरिंग में मृदा की तरलता सीमा के महत्व पर टिप्पणी लिखिए।