Tuesday, 4 August 2026

डिजिटल वेलबीइंग (Digital Wellbeing): तकनीक और जीवन के बीच संतुलन बनाने के लिए छात्रों के लिए एक गाइड

 डिजिटल वेलबीइंग (Digital Wellbeing): तकनीक और जीवन के बीच संतुलन बनाने के लिए छात्रों के लिए एक गाइड


प्रिय छात्रों,


आज के डिजिटल युग में हमारी पढ़ाई, मनोरंजन और सामाजिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा स्क्रीन के सामने बीतता है। भारत में औसत दैनिक स्क्रीन टाइम 6.5 घंटे तक पहुँच गया है और सोशल मीडिया के एक्टिव यूजर्स की संख्या 24 करोड़ हो चुकी है। ऐसे में, हमारे लिए डिजिटल वेलबीइंग को समझना और उसे अपनाना बेहद ज़रूरी हो गया है।


डिजिटल वेलबीइंग का मतलब है यह समझना कि डिजिटल उपयोग का हमारे मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, और ऐसी स्वस्थ डिजिटल आदतें विकसित करना जो हमारे जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाएं।

आइए हम अत्यधिक स्क्रीन टाइम से होने वाले नुकसानों और इससे बचने के उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं:-----


1. स्क्रीन एडिक्शन (Screen Addiction) के लक्षण

क्या आप भी स्क्रीन के जाल में फंसते जा रहे हैं? इन चेतावनी संकेतों से इसे पहचानें:

  • मानसिक लक्षण: स्क्रीन से दूर रहने पर बेचैनी होना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना और एक काल्पनिक ऑनलाइन दुनिया में खो जाना।

  • शारीरिक लक्षण: आँखों में जलन व दर्द (Eye Strain), नींद न आना (Insomnia), सिरदर्द, गर्दन में दर्द और भोजन की अनदेखी या खाने में अनियमितता होना।

  • सामाजिक लक्षण: परिवार और दोस्तों से दूरी बनाना, ऑफलाइन गतिविधियों या हॉबीज में रुचि कम होना, झूठ बोलकर स्क्रीन टाइम छुपाना और स्कूल या कॉलेज से अनुपस्थिति बढ़ना।

2. सोशल मीडिया से होने वाली चिंता (Anxiety) और FOMO

सोशल मीडिया पर दूसरों की तुलनात्मक जीवनशैली देखकर हीनभावना आना, लाइक्स और कमेंट्स पर अपने आत्म-सम्मान को निर्भर कर लेना, साइबर बुलिंग और FOMO (Fear of Missing Out - छूट जाने का डर) मानसिक तनाव के बड़े कारण हैं। इसके अलावा देर रात तक फोन चेक करने से नींद भी खराब होती है।


बचाव के उपाय:

  • डिजिटल उपवास (Digital Detox): हफ्ते में कम से कम एक दिन सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाएं।

  • नोटिफिकेशन बंद करें: ध्यान भटकने से रोकने के लिए पुश नोटिफिकेशन्स (push notifications) को सीमित करें।

  • माइंडफुलनेस अपनाएं: तनाव कम करने के लिए रोजाना 10 मिनट 'माइंडफुल ब्रीदिंग' (mindful breathing) का अभ्यास करें।

  • रियल कनेक्शन बनाएं: सोशल मीडिया से बाहर निकलकर ऑफलाइन मित्रता और परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं।

3. गेमिंग एडिक्शन (Gaming Addiction) को समझें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने "Gaming Disorder" को आधिकारिक तौर पर एक मानसिक स्वास्थ्य विकार माना है। यदि गेम खेलने पर नियंत्रण खोने लगे, अन्य गतिविधियों से रुचि हटने लगे, पढ़ाई का नुकसान होने के बावजूद गेमिंग जारी रहे और गेम न मिलने पर गुस्सा या आक्रामकता आए, तो यह गेमिंग एडिक्शन के लक्षण हैं।


इससे उबरने के लिए गेमिंग टाइम का एक लॉग (रिकॉर्ड) बनाएं, समय की सीमा तय करें और अपना ध्यान खेलकूद, व्यायाम तथा नए ऑफलाइन शौक (hobbies) की तरफ लगाएं।-----

आदतों को सुधारने के लिए एक आसान एक्शन प्लान

अगर आप अपनी स्क्रीन लाइफ को संतुलित करना चाहते हैं, तो इन कदमों को उठाएं:

  1. स्क्रीन-फ्री समय तय करें: भोजन करते समय और सोने से ठीक पहले स्क्रीन से पूरी तरह दूर रहें।

  2. समय सीमा तय करें: वैज्ञानिक तौर पर 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए मनोरंजन का स्क्रीन टाइम प्रतिदिन 2 घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए।

  3. नकारात्मक विचारों को चुनौती दें: जब भी बार-बार फोन देखने या गेम खेलने का मन करे, तो CBT (कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी) तकनीकों की मदद से उन विचारों को नियंत्रित करना सीखें।

  4. परिवार को शामिल करें: अपने माता-पिता के साथ मिलकर स्क्रीन उपयोग के नियम बनाएं ताकि वे आपको ट्रैक पर रख सकें।

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💡 याद रखने योग्य मुख्य संदेश

हमेशा याद रखें: "डिजिटल लत एक स्वास्थ्य समस्या है, कोई नैतिक कमजोरी नहीं"। इसे सही समय पर पहचानना और सुधार की कोशिश करना ही बेहतर परिणाम देता है।


यदि स्क्रीन या सोशल मीडिया के कारण आपको बहुत अधिक चिंता, अवसाद (Depression) या नींद की गंभीर समस्या हो रही है, तो संकोच न करें और तुरंत विशेषज्ञों या इन राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबरों से मदद लें:

  • KIRAN Helpline (भारत सरकार): 1800-599-0019 (24/7 निःशुल्क मानसिक स्वास्थ्य सहायता)

  • NIMHANS Helpline: 080-46110007

  • iCall (TISS): 9152987821

  • Vandrevala Foundation: 1860-2662-345

तकनीक का उपयोग अपनी प्रगति के लिए करें, खुद को तकनीक का गुलाम न बनने दें। सुरक्षित रहें और स्वस्थ रहें!



Sunday, 2 August 2026

क्या केवल डिग्री से नौकरी मिल जाती है? जानिए Recruiter की महत्वपूर्ण सलाह

क्या केवल डिग्री से नौकरी मिल जाती है? जानिए  Recruiter  की महत्वपूर्ण सलाह


प्रस्तावना

आज भी बहुत से विद्यार्थी और अभिभावक यह मानते हैं कि यदि किसी छात्र ने प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर ली या उसके पास B.Tech की डिग्री है, तो अच्छी नौकरी अपने आप मिल जाएगी।

लेकिन बदलते समय के साथ कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया भी बदल चुकी है। आज केवल डिग्री या कॉलेज का नाम पर्याप्त नहीं है। कंपनियाँ ऐसे उम्मीदवारों की तलाश करती हैं जिनके पास व्यावहारिक कौशल (Practical Skills), वास्तविक परियोजनाओं (Projects) का अनुभव, समस्या समाधान की क्षमता (Problem Solving Ability), इंटर्नशिप का अनुभव और सीखने की निरंतर इच्छा हो।

इसी विषय पर लगभग 18 वर्षों का भर्ती अनुभव रखने वाले पूर्व रिक्रूटर, ने अपने अनुभव साझा किए हैं।


आज के Recruiters वास्तव में क्या देखते हैं?

 किसी उम्मीदवार की डिग्री और कॉलेज का नाम पूरी तरह महत्वहीन नहीं है, लेकिन अब यह चयन का सबसे बड़ा आधार भी नहीं है।

आज कंपनियाँ निम्नलिखित बातों को अधिक महत्व देती हैं—

  • वास्तविक तकनीकी कौशल (Technical Skills)

  • स्वयं किए गए प्रोजेक्ट्स

  • इंटर्नशिप का अनुभव

  • समस्या समाधान की क्षमता

  • टीम में कार्य करने की योग्यता

  • सीखने की मानसिकता

  • किए गए कार्यों का वास्तविक प्रभाव (Impact)

यदि आपका कार्य यह साबित करता है कि आप समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, तो आपके चयन की संभावना काफी बढ़ जाती है।


क्या केवल B.Tech की डिग्री इंटरव्यू दिला सकती है?

एक पॉडकास्ट के दौरान जब  से पूछा गया कि यदि किसी उम्मीदवार के पास B.Tech की डिग्री न हो तो क्या इससे फर्क पड़ता है?

उन्होंने स्पष्ट उत्तर दिया—

"सिर्फ B.Tech की डिग्री आपको इंटरव्यू नहीं दिला सकती। किसी भी विषय में स्नातक होना पर्याप्त हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय आपकी क्षमता और कौशल पर निर्भर करता है।"

उनका कहना है कि प्रतिष्ठित कॉलेज से पढ़ाई करने का लाभ केवल प्रारंभिक अवसर तक सीमित हो सकता है। इसके बाद इंटरव्यू में वही उम्मीदवार सफल होता है जो वास्तविक समस्याओं को हल करने की क्षमता रखता हो।


ऐसा रिज्यूमे तुरंत ध्यान आकर्षित करता है

भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक रिक्रूटर के पास सैकड़ों रिज्यूमे आते हैं। ऐसे में आपका रिज्यूमे कुछ ही सेकंड में प्रभाव डालना चाहिए।

प्रसाद राव ने बताया कि जिन रिज्यूमे में निम्न उपलब्धियाँ स्पष्ट दिखाई देती हैं, वे तुरंत ध्यान आकर्षित करते हैं—

  • स्टार्टअप या कंपनी के Co-founder होना

  • ICPC Regionalist जैसी प्रतियोगी उपलब्धियाँ

  • Meta Hacker Cup में भागीदारी या उत्कृष्ट प्रदर्शन

  • विश्वविद्यालय का Gold Medal

  • राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रतियोगिताओं में उपलब्धियाँ

ऐसी उपलब्धियाँ यह दर्शाती हैं कि उम्मीदवार केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने वास्तविक चुनौतियों का सामना भी किया है।


रिज्यूमे में केवल दावे नहीं, प्रमाण होने चाहिए

रिक्रूटर्स केवल यह नहीं देखना चाहते कि आपने क्या लिखा है, बल्कि यह भी देखना चाहते हैं कि आपने वास्तव में क्या किया है।

उदाहरण के लिए—

❌ "मुझे Python अच्छी आती है।"

इसके बजाय लिखें—

✅ "Python का उपयोग करके कॉलेज लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया, जिससे रिकॉर्ड प्रबंधन का समय 40% कम हुआ।"

यानी केवल कौशल लिखना पर्याप्त नहीं है; उसके साथ उसका परिणाम (Impact) भी दिखाना चाहिए।


असफल स्टार्टअप भी आपकी ताकत बन सकता है

बहुत से विद्यार्थी असफलता से डरते हैं, लेकिन प्रसाद राव का मानना है कि यदि किसी छात्र ने स्वयं स्टार्टअप शुरू करने का प्रयास किया, भले ही वह सफल न हुआ हो, तब भी यह उसकी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

क्योंकि इससे यह साबित होता है कि विद्यार्थी—

  • जोखिम लेने का साहस रखता है।

  • नेतृत्व क्षमता रखता है।

  • नई चीजें सीखने के लिए तैयार रहता है।

  • समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करता है।

  • असफलता से सीखकर आगे बढ़ सकता है।

यही गुण आज अधिकांश कंपनियाँ खोजती हैं।


इंजीनियरिंग और डिप्लोमा छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह

 केवल कॉलेज की पढ़ाई पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को लगातार स्वयं को बेहतर बनाते रहना चाहिए।

इसके लिए वे निम्न सुझाव देते हैं—

1. मजबूत बुनियादी ज्ञान विकसित करें

  • विषय की मूल अवधारणाओं (Fundamentals) को अच्छी तरह समझें।

  • केवल परीक्षा पास करने तक सीमित न रहें।


2. लगातार नई तकनीक सीखें

हर वर्ष नई तकनीकें आती हैं। इसलिए सीखना कभी बंद न करें।


3. वास्तविक प्रोजेक्ट बनाएं

ऐसे प्रोजेक्ट तैयार करें जिनका उपयोग वास्तविक जीवन में किया जा सके।


4. इंटर्नशिप अवश्य करें

इंटर्नशिप आपको उद्योग (Industry) की वास्तविक कार्यप्रणाली सिखाती है और आपका आत्मविश्वास बढ़ाती है।


5. प्रतियोगिताओं में भाग लें

  • Hackathon

  • Coding Competition

  • Technical Events

  • Innovation Challenge

  • Model Making Competition

इन प्रतियोगिताओं से आपकी समस्या समाधान क्षमता विकसित होती है।


6. अपना पोर्टफोलियो तैयार करें

आज केवल Resume पर्याप्त नहीं है।

अपने कार्यों का डिजिटल पोर्टफोलियो बनाइए, जिसमें शामिल हों—

  • Projects

  • Internship Experience

  • Certificates

  • Technical Skills

  • Achievements

  • GitHub या अन्य तकनीकी प्रोफाइल (यदि लागू हो)


डिप्लोमा विद्यार्थियों के लिए विशेष संदेश

यदि आप डिप्लोमा के विद्यार्थी हैं, तो यह मत सोचिए कि केवल डिग्री का नाम आपकी सफलता तय करेगा। उद्योग आज ऐसे युवाओं की तलाश में है जो—

  • मशीनों और उपकरणों पर व्यावहारिक कार्य कर सकें।

  • नई तकनीक जल्दी सीख सकें।

  • टीम के साथ प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

  • जिम्मेदारी लेकर समस्याओं का समाधान कर सकें।

  • अपने ज्ञान को व्यवहार में लागू कर सकें।

यदि आपके पास ये गुण हैं, तो आपके लिए रोजगार और करियर के अनेक अवसर उपलब्ध हैं।


निष्कर्ष

आज का रोजगार बाजार तेजी से बदल रहा है। केवल डिग्री या प्रतिष्ठित कॉलेज अब सफलता की गारंटी नहीं हैं।

सफल वही विद्यार्थी होगा जो—

  • लगातार सीखता रहे।

  • व्यावहारिक कौशल विकसित करे।

  • वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करे।

  • इंटर्नशिप और प्रतियोगिताओं में भाग ले।

  • अपनी उपलब्धियों का ठोस प्रमाण प्रस्तुत कर सके।

याद रखिए—

"डिग्री आपको अवसर का दरवाज़ा दिखा सकती है, लेकिन आपकी स्किल्स, मेहनत और वास्तविक उपलब्धियाँ ही उस दरवाज़े को खोलती हैं।"


विद्यार्थियों के लिए अंतिम संदेश

अपने रिज्यूमे में केवल यह मत लिखिए कि आप क्या जानते हैं; ऐसा कार्य कीजिए कि आपका काम स्वयं आपकी पहचान बन जाए। यही आज के उद्योग जगत की सबसे बड़ी आवश्यकता है। 

Friday, 31 July 2026

मानसिक स्वास्थ्य परामर्श हेतु मार्गदर्शन

डिप्लोमा विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य मार्गदर्शिका

मानसिक स्वास्थ्य को समझें, पहचानें और समय पर सहायता लें

महत्वपूर्ण सूचना:
यह लेख केवल जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का अंतिम निदान केवल योग्य मनोवैज्ञानिक (Clinical Psychologist) या मनोचिकित्सक (Psychiatrist) ही कर सकते हैं।


प्रस्तावना

आज की तेज़ रफ्तार और प्रतिस्पर्धी जीवनशैली में मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। पढ़ाई का दबाव, परीक्षा, करियर की चिंता, पारिवारिक समस्याएँ, सोशल मीडिया और डिजिटल जीवन कई बार विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन को प्रभावित करते हैं।

यदि समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए तो अधिकांश समस्याओं का समाधान संभव है।

शिक्षक, विभागाध्यक्ष, मेंटर और काउंसलर का कार्य उपचार करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों की समस्या को पहचानकर उचित सहायता उपलब्ध कराना है।


मानसिक स्वास्थ्य सहायता के तीन प्रमुख उद्देश्य

  • मानसिक परेशानी के प्रारंभिक संकेतों को पहचानना।
  • विद्यार्थी को भावनात्मक सहारा देना।
  • आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ के पास समय पर भेजना।

1. जब मानसिक तनाव शरीर में दिखाई देने लगे

कई बार मानसिक तनाव सीधे उदासी के रूप में दिखाई नहीं देता बल्कि शरीर में अलग-अलग समस्याओं के रूप में सामने आता है।

संभावित संकेत

  • बार-बार पेट दर्द या सिर दर्द होना जबकि सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य हों।
  • कॉलेज या कक्षा में आने से बचना।
  • पढ़ाई में अचानक गिरावट।
  • किसी से बात न करना।
  • अकेले रहना।
  • भूख कम लगना।
  • लगातार उदास रहना।

क्या करें?

यदि ये समस्याएँ लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक बनी रहें और विद्यार्थी की सामान्य दिनचर्या प्रभावित होने लगे तो उसे काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलने के लिए प्रेरित करें।


2. डिजिटल दुनिया और मानसिक स्वास्थ्य

मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम आज जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन इनका अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

साइबर बुलिंग के संकेत

  • सोशल मीडिया से डर लगना।
  • स्कूल या कॉलेज जाना बंद कर देना।
  • फोन बजने पर घबराहट होना।
  • आत्मविश्वास में कमी।
  • नींद खराब होना।

गेमिंग की लत के संकेत

  • प्रतिदिन कई घंटों तक लगातार गेम खेलना।
  • पढ़ाई पूरी तरह छोड़ देना।
  • भोजन और नींद की उपेक्षा।
  • गेम रोकने पर गुस्सा या हिंसक व्यवहार।
  • सामाजिक जीवन से दूरी।

क्या करें?

ऐसी स्थिति में विद्यार्थी को डाँटने या मोबाइल छीनने की बजाय शांतिपूर्वक बातचीत करें और आवश्यकता होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लें।


3. अनुशासनहीनता या मानसिक समस्या?

हर शरारत केवल बदमाशी नहीं होती। कई बार इसके पीछे मानसिक या न्यूरोलॉजिकल कारण भी हो सकते हैं।

किन बातों पर ध्यान दें?

  • अत्यधिक चंचलता।
  • पाँच मिनट भी ध्यान केंद्रित न कर पाना।
  • बिना सोचे कार्य करना।
  • बार-बार नियम तोड़ना।
  • दूसरों को नुकसान पहुँचाना।
  • अपने व्यवहार पर कोई पछतावा न होना।

यदि यह व्यवहार लंबे समय तक बना रहे और पढ़ाई या सामाजिक जीवन को प्रभावित करे तो विशेषज्ञ से मूल्यांकन करवाना आवश्यक हो सकता है।


4. परीक्षा का तनाव या पैनिक अटैक?

परीक्षा का तनाव सामान्य है, लेकिन यदि तनाव अत्यधिक हो जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

संभावित संकेत

  • परीक्षा से पहले तेज धड़कन।
  • साँस लेने में कठिनाई।
  • हाथ-पैर काँपना।
  • अत्यधिक घबराहट।
  • परीक्षा हॉल में प्रवेश न कर पाना।
  • बार-बार बेहोश होना।

इसी प्रकार यदि कोई विद्यार्थी लगातार भोजन कम कर रहा हो, अपने शरीर को लेकर अत्यधिक असंतुष्ट रहता हो या तेजी से वजन घट रहा हो, तो भी विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक हो सकता है।


5. सबसे गंभीर संकेत – तुरंत सहायता की आवश्यकता

कुछ परिस्थितियाँ आपातकालीन होती हैं।

तुरंत ध्यान देने योग्य संकेत

  • स्वयं को नुकसान पहुँचाना।
  • आत्महत्या की बात करना।
  • सोशल मीडिया पर विदाई जैसे संदेश लिखना।
  • नशे का अत्यधिक सेवन।
  • बार-बार कहना कि "अब जीने का कोई मतलब नहीं।"

ऐसी स्थिति में क्या करें?

  • विद्यार्थी को अकेला न छोड़ें।
  • तुरंत परिवार को सूचना दें।
  • मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या अस्पताल से तत्काल संपर्क करें।
  • स्थिति को हल्के में न लें।

विद्यार्थियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव

✔ पर्याप्त नींद लें।

✔ नियमित व्यायाम करें।

✔ सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करें।

✔ अपनी समस्याएँ किसी विश्वसनीय शिक्षक, मित्र या परिवार के सदस्य से साझा करें।

✔ आवश्यकता होने पर काउंसलर से मिलने में संकोच न करें।

✔ मानसिक बीमारी किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं होती।


शिक्षकों और मेंटर्स की भूमिका

एक शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है—

  • विद्यार्थियों के व्यवहार में बदलाव को पहचानना।
  • संवेदनशीलता से उनकी बात सुनना।
  • उन्हें सुरक्षित वातावरण देना।
  • उचित समय पर विशेषज्ञ तक पहुँचने में सहायता करना।

याद रखें

मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।

समय पर पहचान, संवेदनशील व्यवहार और सही मार्गदर्शन किसी विद्यार्थी का भविष्य ही नहीं, उसका जीवन भी बचा सकता है।


सहायता लेने में संकोच न करें

यदि आप लगातार उदासी, घबराहट, अत्यधिक तनाव, आत्म-नुकसान के विचार या किसी अन्य मानसिक परेशानी का अनुभव कर रहे हैं, तो अपने माता-पिता, शिक्षक, मेंटर, विभागाध्यक्ष, संस्थान के काउंसलर या किसी योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें।

याद रखें: सहायता माँगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस और समझदारी का संकेत है।

Saturday, 11 July 2026

मानसिक स्वास्थ जागरूकता प्रशिक्षण

 कार्यक्रम प्रतिवेदन

मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम

कार्यालय आयुक्त, तकनीकी शिक्षा, मध्यप्रदेश, भोपाल के पत्र क्रमांक ई-447676/यो/के-1/05/2026/499, भोपाल, दिनांक 06.07.2026 के अनुपालन में शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर में विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन तथा तनाव प्रबंधन के उद्देश्य से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में जिला चिकित्सालय, अशोकनगर की उमंग काउंसलर श्रीमती वैशाली माथुर ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में सहभागिता करते हुए संस्था के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव के कारण एवं उसके प्रभाव, तनाव प्रबंधन की प्रभावी तकनीकों तथा आत्महत्या की रोकथाम से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की।

प्रशिक्षण के दौरान श्रीमती वैशाली माथुर द्वारा प्रतिभागियों को बताया गया कि मानसिक तनाव अथवा किसी भी प्रकार की मनोवैज्ञानिक समस्या की स्थिति में सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर जिला चिकित्सालय, अशोकनगर में स्थापित मन-कक्ष में अपनी समस्याएँ साझा करने तथा उपलब्ध हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग कर समय पर परामर्श एवं सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में संस्था के समस्त अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में संस्था के नोडल अधिकारी महेन्द्र कुमार नेमा  द्वारा उपस्थित सभी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला गया तथा सभी से तनावमुक्त, सकारात्मक एवं सहयोगपूर्ण शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया। अंत में प्रशिक्षक एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।