Tuesday, 1 September 2026

मृदा का क्षेत्र घनत्व (Field Density) ज्ञात करने की रेत प्रतिस्थापन विधि

                            शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)

सिविल इंजीनियरिंग विभाग — मृदा यांत्रिकी प्रयोगशाला (Soil Mechanics Laboratory)

मृदा का क्षेत्र घनत्व (Field Density) ज्ञात करने की रेत प्रतिस्थापन विधि

(Sand Replacement Method — IS : 2720 (Part 28) – 1974, Reaffirmed)

1. उद्देश्य (Aim)

भारतीय मानक कोड IS : 2720 (Part 28) – 1974 "Methods of Test for Soils — Determination of Dry Density of Soils, In-Place, by the Sand Replacement Method" के अनुसार, रेत प्रतिस्थापन विधि (Sand Replacement Method) द्वारा प्राकृतिक अथवा संहनित (compacted) मृदा — चाहे वह महीन, मध्यम अथवा स्थूल दानेदार हो — का क्षेत्र घनत्व (Field Density) एवं शुष्क घनत्व (Dry Density) ज्ञात करना।

2. सिद्धांत (Principle)

क्षेत्र में मृदा की सतह पर एक छोटा बेलनाकार गड्ढा (pit/hole) खोदकर, उससे निकाली गई संपूर्ण मृदा का भार व जल-अंश ज्ञात किया जाता है। तत्पश्चात इसी गड्ढे को ज्ञात एकक भार (bulk density) की मानक/अंशांकित रेत (calibrated sand) से भरा जाता है। गड्ढे को भरने में लगी रेत के भार तथा रेत के ज्ञात एकक भार से गड्ढे का आयतन ज्ञात किया जाता है। इस प्रकार, खोदी गई मृदा के भार तथा गड्ढे के आयतन के अनुपात से मृदा का क्षेत्र घनत्व प्राप्त होता है।

यह विधि विशेषरूप से बजरीयुक्त (gravelly), असंसंजक (cohesionless) अथवा स्थूल दानेदार (coarse-grained) मृदाओं — जैसे ग्रेनुलर सब-बेस (GSB), वेट मिक्स मैकाडम (WMM) — हेतु उपयुक्त है, जहां कोर कटर विधि द्वारा प्रतिदर्श निकालना (undisturbed core प्राप्त करना) संभव नहीं होता।

3. उपकरण (Apparatus)

  • रेत डालने वाला बेलन/सैंड पोरिंग सिलिंडर (Sand Pouring Cylinder, SPC) — शंक्वाकार तल (cone) व एक शटर (shutter/valve) सहित — छोटे गड्ढों (150 mm गहराई तक) हेतु छोटा SPC तथा बड़े गड्ढों (250 mm गहराई तक) हेतु बड़ा SPC प्रयुक्त होता है।

  • अंशांकन पात्र/कैलिब्रेटिंग कंटेनर (Calibrating Container) — ज्ञात आंतरिक आयतन (V) का बेलनाकार धातु पात्र (छोटे SPC हेतु ≈100 mm व्यास × 150 mm गहराई; बड़े SPC हेतु ≈200 mm व्यास × 250 mm गहराई)।

  • धातु ट्रे — केंद्र में गोल छिद्र सहित (Metal Tray with central hole)।

  • मानक/अंशांकित रेत (Standard/Calibrated Sand) — स्वच्छ, समांगी, शुष्क, 1.00 mm छलनी से गुजरी व 600 माइक्रोन छलनी पर रुकी हुई प्राकृतिक रेत।

  • गड्ढा खोदने के उपकरण — स्क्रेपर, बेंट स्पून/डिब्बर (bent spoon/dibber)।

  • कांच की समतल पट्टिका (Glass Plate) — लगभग 600 mm × 600 mm × 10 mm।

  • तौल-यंत्र/तुला (Balance) — क्षमता 15 kg, संवेदनशीलता 1 g।

  • धातु के पात्र (Metal Containers), जल-अंश ज्ञात करने हेतु उपकरण (IS 2720 Part II अनुसार)।

4. चरण-अ: रेत की अंशांकित एकक भार (Bulk Density) ज्ञात करना

यह प्रक्रिया दो उप-चरणों में सम्पन्न होती है — (i) SPC के शंकु (cone) को भरने हेतु आवश्यक रेत का भार ज्ञात करना, तथा (ii) रेत का एकक भार (bulk density) ज्ञात करना।

4.1 शंकु (Cone) में लगने वाली रेत का भार ज्ञात करना

  1. SPC को रेत से पूर्ण भरें (ऊपरी सिरे पर लगभग 1 cm खाली स्थान रखें) तथा भार ज्ञात कर W₁ अंकित करें।

  2. SPC को कांच की समतल पट्टिका पर लंबवत रखें, शटर खोलें तथा रेत को शंकु में स्वतः प्रवाहित होकर भरने दें, प्रवाह रुकने पर शटर बंद करें।

  3. SPC को पट्टिका से उठाएं, शंकु में शेष रेत को पट्टिका से सावधानी से वापस SPC में डालें (ताकि पुनः भार W₁ के बराबर हो जाए) — इस चरण का उद्देश्य केवल शंकु को भरने में लगी रेत का भार ज्ञात करना है, जो अगले चरण में उपयोगी होगा।

  4. वैकल्पिक रूप से — पट्टिका पर बचे रेत को अलग तौलकर, शंकु में लगी रेत का भार Wc = (कुल भरी रेत) − (पट्टिका पर बची रेत) से भी ज्ञात किया जा सकता है।

4.2 अंशांकन पात्र द्वारा रेत का एकक भार ज्ञात करना

  1. अंशांकन पात्र (calibrating container) के आंतरिक व्यास (d) व गहराई (h) मापकर उसका आयतन ज्ञात करें: V = (π/4) × d² × h।

  2. SPC को पुनः W₁ भार तक रेत से भरें।

  3. SPC को अंशांकन पात्र के ठीक ऊपर संकेंद्रीय (concentrically) रखें, शटर खोलें तथा रेत को पात्र व शंकु दोनों में तब तक प्रवाहित होने दें जब तक प्रवाह स्वतः रुक न जाए, फिर शटर बंद करें।

  4. SPC व शेष रेत का भार ज्ञात कर W₂ अंकित करें।

अंशांकन पात्र भरने में लगी रेत का भार, Wa = (W₁ − W₂) − Wc

रेत का एकक भार (Bulk Density), γs = Wa / V

5. चरण-ब: क्षेत्र में परीक्षण (Field Test Procedure)

  1. जिस स्थल पर परीक्षण करना हो, वहां मृदा की सतह को साफ व समतल करें।

  2. केंद्रीय छिद्र वाली धातु ट्रे को समतल सतह पर रखें।

  3. ट्रे के छिद्र के माध्यम से डिब्बर/स्क्रेपर से मृदा खोदकर एक बेलनाकार गड्ढा (गहराई सामान्यतः अंशांकन पात्र की गहराई के बराबर, ≈150 mm अथवा संहनित परत की मोटाई के बराबर) बनाएं। गड्ढे की दीवारों को छूने से बचें।

  4. गड्ढे से निकाली गई संपूर्ण मृदा को सावधानीपूर्वक एकत्रित कर उसका भार ज्ञात करें और W अंकित करें (गीली मृदा का भार)।

  5. खोदी गई मृदा में से एक प्रातिनिधिक भाग लेकर उसका जल-अंश (w%) IS 2720 (Part II) अनुसार ज्ञात करें।

  6. SPC को पुनः W₁ भार तक रेत से भरें, फिर ट्रे के छिद्र (जो गड्ढे के ठीक ऊपर स्थित है) के ऊपर संकेंद्रीय रखें।

  7. शटर खोलें तथा रेत को गड्ढे व शंकु दोनों में तब तक प्रवाहित होने दें जब तक प्रवाह स्वतः रुक न जाए, फिर शटर बंद करें।

  8. SPC व शेष रेत का भार ज्ञात कर W₃ अंकित करें।

गड्ढा भरने में लगी रेत का भार, Wb = (W₁ − W₃) − Wc

गड्ढे का आयतन, V(hole) = Wb / γs

6. गणना — सूत्र (Calculation — Formula)

आर्द्र/क्षेत्र घनत्व: ρ = W / V(hole)

शुष्क घनत्व: ρd = ρ × 100 / (100 + w)

जहां — W = गड्ढे से निकाली गई गीली मृदा का भार, V(hole) = गड्ढे का आयतन, w = मृदा का जल-अंश (प्रतिशत में)।

संहनन की मात्रा (Degree of Compaction) = (क्षेत्र में शुष्क घनत्व / प्रयोगशाला में अधिकतम शुष्क घनत्व MDD) × 100%

7. प्रेक्षण सारणी (Observation Table — प्रयोगशाला हेतु प्रारूप)

क्र.

विवरण (Description)

मान

A

अंशांकन (Calibration)


1

अंशांकन पात्र का आयतन, V = (π/4)d²h (cm³)


2

SPC + रेत का प्रारंभिक भार, W₁ (g)


3

शंकु भरने में लगी रेत का भार, Wc (g)


4

पात्र भरने के पश्चात SPC + शेष रेत का भार, W₂ (g)


5

पात्र भरने में लगी रेत का भार, Wa = (W₁−W₂)−Wc (g)


6

रेत का एकक भार, γs = Wa/V (g/cm³)


B

क्षेत्र परीक्षण (Field Test)


7

गड्ढे से निकाली गीली मृदा का भार, W (g)


8

मृदा का जल-अंश, w (%)


9

गड्ढा भरने के पश्चात SPC + शेष रेत का भार, W₃ (g)


10

गड्ढा भरने में लगी रेत का भार, Wb = (W₁−W₃)−Wc (g)


11

गड्ढे का आयतन, V(hole) = Wb/γs (cm³)


12

आर्द्र घनत्व, ρ = W/V(hole) (g/cm³)


13

शुष्क घनत्व, ρd = ρ×100/(100+w) (g/cm³)



गणना का उदाहरण (Solved Example — छात्रों हेतु)

अंशांकन: अंशांकन पात्र का आयतन V = 1000 cm³, W₁ = 7500 g, Wc = 440 g, W₂ = 5630 g।

Wa = (7500 − 5630) − 440 = 1870 − 440 = 1430 g

γs = 1430 / 1000 = 1.43 g/cm³

क्षेत्र परीक्षण: गीली मृदा का भार W = 1980 g, जल-अंश w = 10%, गड्ढा भरने पश्चात W₃ = 5900 g।

Wb = (7500 − 5900) − 440 = 1600 − 440 = 1160 g

V(hole) = 1160 / 1.43 ≈ 811 cm³

आर्द्र घनत्व, ρ = 1980 / 811 = 2.44 g/cm³

शुष्क घनत्व, ρd = 2.44 × 100 / (100+10) = 2.22 g/cm³

8. सावधानियां (Precautions)

  • गड्ढा खोदते समय आसपास की मृदा को अशांत/ढीला (disturb) न करें, न ही गड्ढे की दीवारों को दबाएं।

  • खोदी गई संपूर्ण मृदा को बिना किसी हानि के एकत्रित करें — कोई भी कण छूटने पर परिणाम में त्रुटि आएगी।

  • रेत सदैव स्वच्छ, शुष्क व एकसमान श्रेणीयुक्त (uniformly graded) होनी चाहिए — नमीयुक्त अथवा मिश्रित रेत से एकक भार में त्रुटि आती है।

  • रेत का प्रवाह स्वाभाविक रूप से (बिना कंपन/झटके के) होने दें।

  • SPC को प्रत्येक बार ठीक W₁ भार तक ही भरें, ताकि शंकु में भरने वाली रेत की मात्रा स्थिर रहे।

  • गड्ढे की गहराई अंशांकन पात्र की गहराई अथवा संहनित परत की मोटाई के बराबर रखें।

  • अंशांकन प्रक्रिया समय-समय पर दोहराते रहें, विशेषकर रेत बदलने पर।

9. कोर कटर विधि से तुलना (Comparison with Core Cutter Method)

आधार

रेत प्रतिस्थापन विधि

कोर कटर विधि

उपयुक्त मृदा

सभी प्रकार की मृदा — महीन, मध्यम, स्थूल दानेदार व बजरीयुक्त

केवल महीन दाने वाली, संसंजक मृदा

शुद्धता (Accuracy)

अधिक शुद्ध व विश्वसनीय

अपेक्षाकृत कम शुद्ध

प्रक्रिया

अपेक्षाकृत जटिल व समयसाध्य (अंशांकन आवश्यक)

सरल व त्वरित

उपयोग

GSB, WMM, बजरीयुक्त तटबंध आदि

मृत्तिका, दोमट जैसी संसंजक मृदा

10. सिविल इंजीनियरिंग में महत्व (Engineering Significance)

  • सड़क की उप-आधार (subgrade), ग्रेनुलर सब-बेस (GSB), वेट मिक्स मैकाडम (WMM) व तटबंध निर्माण में संहनन गुणवत्ता नियंत्रण (compaction quality control) हेतु सर्वाधिक विश्वसनीय व मानक विधि।

  • प्रॉक्टर परीक्षण (IS 2720 Part 7/8) से प्राप्त अधिकतम शुष्क घनत्व (MDD) की तुलना में क्षेत्र में प्राप्त संहनन प्रतिशत (सामान्यतः न्यूनतम 95–98% MDD अपेक्षित) का सत्यापन।

  • MoRTH व IRC विनिर्देशों (specifications) के अनुसार राजमार्ग निर्माण में गुणवत्ता आश्वासन (quality assurance) हेतु अनिवार्य परीक्षण।

  • नींव, तटबंध व बांध की स्थिरता विश्लेषण हेतु आवश्यक आधारभूत आंकड़ा।

अभ्यास हेतु प्रश्न: (1) IS 2720 (Part 28) के अनुसार रेत प्रतिस्थापन विधि द्वारा क्षेत्र घनत्व ज्ञात करने की संपूर्ण विधि (अंशांकन सहित) सचित्र वर्णन कीजिए। (2) रेत के एकक भार तथा गड्ढे के आयतन ज्ञात करने के सूत्र स्थापित कीजिए। (3) रेत प्रतिस्थापन विधि व कोर कटर विधि में अंतर स्पष्ट कीजिए, प्रत्येक कहां उपयुक्त है? (4) यदि गीली मृदा का भार 2000 g, जल-अंश 12%, गड्ढे का आयतन 800 cm³ हो तो शुष्क घनत्व ज्ञात कीजिए। (5) राजमार्ग निर्माण में रेत प्रतिस्थापन विधि द्वारा संहनन गुणवत्ता नियंत्रण के महत्व पर टिप्पणी लिखिए।


मृदा का क्षेत्र घनत्व (Field Density) ज्ञात करने की कोर कटर विधि

                           शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)

सिविल इंजीनियरिंग विभाग — मृदा यांत्रिकी प्रयोगशाला (Soil Mechanics Laboratory)

मृदा का क्षेत्र घनत्व (Field Density) ज्ञात करने की कोर कटर विधि

(Core Cutter Method — IS : 2720 (Part 29) – 1975, Reaffirmed)

1. उद्देश्य (Aim)

भारतीय मानक कोड IS : 2720 (Part 29) – 1975 "Methods of Test for Soils — Determination of Dry Density of Soils, In-Place, by the Core-Cutter Method" के अनुसार, कोर कटर विधि (Core Cutter Method) द्वारा क्षेत्र (in-situ) में संहनित/प्राकृतिक मृदा का क्षेत्र घनत्व (Field Density) एवं शुष्क घनत्व (Dry Density) ज्ञात करना।

2. कार्यक्षेत्र/उपयोगिता (Scope)

यह विधि मुख्यतः महीन दाने वाली, संसंजक (cohesive), समांगी (homogeneous) एवं कंकड़-पत्थर (gravel/aggregation) रहित मृदाओं हेतु उपयुक्त है, जिनमें कटर आसानी से गाड़ा (drive) जा सके। कठोर, बजरीयुक्त (gravelly) अथवा शिलाखंडयुक्त (boulder) मृदाओं में इस विधि का प्रयोग संभव नहीं है — ऐसी मृदाओं हेतु रेत प्रतिस्थापन विधि (Sand Replacement Method — IS 2720 Part 28) अधिक उपयुक्त एवं शुद्ध मानी जाती है।

3. परिभाषाएं (Definitions)

  • क्षेत्र घनत्व/आर्द्र घनत्व (Bulk/Field Density, ρ) — मृदा के इकाई आयतन का कुल भार (जल सहित)।

  • शुष्क घनत्व (Dry Density, ρd) — मृदा के इकाई (कुल) आयतन में उपस्थित केवल ठोस कणों का भार।

  • क्षेत्र में मृदा का घनत्व, संहनन की गुणवत्ता (compaction quality control), भार वहन क्षमता एवं स्थिरता विश्लेषण हेतु आवश्यक एक मूल आंकड़ा है।

4. उपकरण (Apparatus)

  • बेलनाकार कोर कटर (Cylindrical Core Cutter) — स्टील का, दोनों सिरों पर खुला — सामान्य आंतरिक व्यास लगभग 100 mm तथा ऊंचाई लगभग 130 mm (आयतन ≈ 1000 cm³)।

  • स्टील डॉली (Steel Dolly) — कटर के ऊपर रखकर हथौड़े की चोट कटर तक समान रूप से पहुंचाने हेतु।

  • स्टील रैमर (Steel Rammer) — कटर को मृदा में गाड़ने (driving) हेतु।

  • तौल-यंत्र/तुला (Balance) — 1 g सटीकता, क्षमता लगभग 15 kg।

  • सीधी धार/स्ट्रेट एज (Straight Edge) — अतिरिक्त मृदा को समतल काटने हेतु।

  • वर्गाकार धातु ट्रे (Square Metal Tray) — लगभग 300 mm × 300 mm × 40 mm आकार की।

  • कुदाल/फावड़ा (Spade/Pickaxe), खुरपी/ट्रॉवेल (Trowel), चाकू (Knife)।

  • जल-अंश ज्ञात करने हेतु उपकरण — IS: 2720 (Part II)-1973 अनुसार (ओवन, तौल-यंत्र, कंटेनर आदि)।

5. प्रयोग विधि (Procedure)

  1. कोर कटर के आंतरिक व्यास (d) व ऊंचाई (h) को निकटतम 0.25 mm तक मापें तथा कटर का आंतरिक आयतन (Vc) परिकलित करें।

  2. कोर कटर को साफ करें तथा उसका भार ज्ञात कर W₁ अंकित करें (खाली कटर का भार)।

  3. जिस स्थल पर परीक्षण करना हो, वहां मृदा की सतह से ढीली मिट्टी, वनस्पति, कंकड़ आदि हटाकर लगभग 30 cm × 30 cm क्षेत्रफल का भाग समतल (level) करें।

  4. स्टील डॉली को कटर के ऊपर रखें तथा रैमर की सहायता से कटर को लंबवत (vertically) मृदा में तब तक गाड़ें, जब तक डॉली का लगभग 15 mm भाग सतह के ऊपर शेष रह जाए। कटर को गाड़ते समय हिलने (rocking) न दें।

  5. कटर के चारों ओर से फावड़े की सहायता से सावधानीपूर्वक खोदकर कटर को मृदा-प्रतिदर्श सहित बाहर निकालें, इस प्रकार कि दोनों सिरों से कुछ अतिरिक्त मृदा बाहर की ओर निकली रहे।

  6. डॉली हटाएं तथा कटर के दोनों (ऊपरी व निचले) सिरों पर स्ट्रेट एज/चाकू से अतिरिक्त मृदा को सावधानीपूर्वक इस प्रकार काटें कि कटर के भीतर मृदा का आयतन ठीक कटर के आंतरिक आयतन (Vc) के बराबर हो जाए।

  7. कटर व उसमें भरी हुई गीली मृदा का संयुक्त भार ज्ञात कर W₂ अंकित करें (कटर + गीली मृदा का भार)।

  8. कटर से मृदा का एक प्रातिनिधिक (representative) भाग निकालकर, उसका जल-अंश (w%) IS 2720 (Part II) की ओवन शुष्कन विधि से ज्ञात करें।

  9. इसी प्रक्रिया को स्थल के कम-से-कम तीन भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर दोहराकर औसत क्षेत्र घनत्व ज्ञात करें।

6. गणना — सूत्र (Calculation — Formula)

कटर का आयतन: Vc = (π/4) × d² × h

आर्द्र/क्षेत्र घनत्व: ρ = (W₂ − W₁) / Vc

शुष्क घनत्व: ρd = ρ × 100 / (100 + w)

जहां — d = कटर का आंतरिक व्यास, h = कटर की ऊंचाई, W₁ = खाली कटर का भार, W₂ = कटर + गीली मृदा का भार, w = मृदा का जल-अंश (प्रतिशत में)।

संहनन की मात्रा (Degree of Compaction) = (क्षेत्र में शुष्क घनत्व / प्रयोगशाला में अधिकतम शुष्क घनत्व MDD) × 100%

7. प्रेक्षण सारणी (Observation Table — प्रयोगशाला हेतु प्रारूप)

क्र.

विवरण (Description)

प्रतिदर्श 1

प्रतिदर्श 2

प्रतिदर्श 3

1

कटर का आंतरिक व्यास, d (cm)




2

कटर की ऊंचाई, h (cm)




3

कटर का आयतन, Vc = (π/4)d²h (cm³)




4

खाली कटर का भार, W₁ (g)




5

कटर + गीली मृदा का भार, W₂ (g)




6

गीली मृदा का भार = (W₂ − W₁) (g)




7

आर्द्र घनत्व, ρ = (W₂−W₁)/Vc (g/cm³)




8

जल-अंश, w (%)




9

शुष्क घनत्व, ρd = ρ×100/(100+w) (g/cm³)





गणना का उदाहरण (Solved Example — छात्रों हेतु)

मान लीजिए: कटर का व्यास d = 10 cm, ऊंचाई h = 12.73 cm, W₁ = 1500 g, W₂ = 3480 g, जल-अंश w = 12%।

कटर का आयतन Vc = (π/4) × 10² × 12.73 ≈ 1000 cm³

गीली मृदा का भार = W₂ − W₁ = 3480 − 1500 = 1980 g

आर्द्र घनत्व, ρ = 1980 / 1000 = 1.98 g/cm³

शुष्क घनत्व, ρd = 1.98 × 100 / (100 + 12) = 1.77 g/cm³

8. सावधानियां (Precautions)

  • कटर को गाड़ते समय हथौड़े/रैमर की चोट डॉली के केंद्र पर लंबवत लगाएं, ताकि कटर तिरछा (tilted) न हो।

  • कटर को अत्यधिक बल से न गाड़ें, अन्यथा मृदा-कण संकुचित (disturbed/compressed) होकर वास्तविक घनत्व से भिन्न परिणाम देंगे।

  • मृदा-सतह अत्यधिक शुष्क अथवा अत्यधिक कठोर होने पर कटर को गाड़ने से पूर्व स्थल को हल्का ढीला करना आवश्यक हो सकता है — परंतु इससे परिणाम की शुद्धता प्रभावित हो सकती है, अतः सावधानी आवश्यक है।

  • कटर के दोनों सिरों पर मृदा को इस प्रकार काटें कि भीतर मृदा का आयतन ठीक कटर के आंतरिक आयतन के बराबर रहे — अतिरिक्त दबाव से मृदा संकुचित न हो।

  • कंकड़/बजरीयुक्त अथवा अत्यधिक शुष्क, भंगुर (crumbling) मृदा में यह विधि उपयुक्त नहीं — ऐसी दशाओं में रेत प्रतिस्थापन विधि अपनाएं।

  • प्रतिदर्श निकालने के तुरंत पश्चात तौल कर लें, ताकि वाष्पीकरण से जल-अंश में त्रुटि न हो।

9. विधि की सीमाएं (Limitations)

  • यह विधि केवल महीन दाने वाली, संसंजक (cohesive) मृदाओं तक सीमित है; बालू व बजरीयुक्त मृदाओं हेतु अनुपयुक्त है।

  • कटर गाड़ते समय मृदा का संकुचन (compression) या विक्षोभ (disturbance) होने की संभावना रहती है, जिससे परिणाम रेत प्रतिस्थापन विधि की तुलना में अपेक्षाकृत कम शुद्ध (less accurate) माना जाता है।

  • अत्यधिक कठोर, शुष्क अथवा शिलाखंडयुक्त मृदा में कटर को गाड़ना कठिन अथवा असंभव होता है।

10. सिविल इंजीनियरिंग में महत्व (Engineering Significance)

  • तटबंध (embankment), सड़क उप-आधार (subgrade) एवं बांध निर्माण में संहनन (compaction) की गुणवत्ता नियंत्रण (quality control) हेतु — क्षेत्र में प्राप्त शुष्क घनत्व की तुलना प्रयोगशाला में प्रॉक्टर परीक्षण (IS 2720 Part 7/8) से प्राप्त अधिकतम शुष्क घनत्व (MDD) से की जाती है।

  • मृदा की भार वहन क्षमता (bearing capacity), ढाल स्थिरता विश्लेषण (slope stability analysis) तथा भूमिगत संरचनाओं के अभिकल्पन हेतु क्षेत्र घनत्व एक आवश्यक आंकड़ा है।

  • संहनित परत (compacted layer) को स्वीकृत करने अथवा अस्वीकृत करने का निर्णय संहनन की मात्रा (percentage compaction, सामान्यतः 95–98% MDD अपेक्षित) के आधार पर लिया जाता है।

अभ्यास हेतु प्रश्न: (1) IS 2720 (Part 29) के अनुसार कोर कटर विधि द्वारा क्षेत्र घनत्व ज्ञात करने की विधि सचित्र वर्णन कीजिए। (2) आर्द्र घनत्व व शुष्क घनत्व ज्ञात करने के सूत्र स्थापित कीजिए। (3) यदि कटर का व्यास 10 cm, ऊंचाई 13 cm, W₁ = 1480 g, W₂ = 3500 g तथा जल-अंश 15% हो तो शुष्क घनत्व ज्ञात कीजिए। (4) कोर कटर विधि व रेत प्रतिस्थापन विधि में क्या अंतर है, तथा प्रत्येक कहां उपयुक्त है? (5) सड़क एवं बांध निर्माण में संहनन गुणवत्ता नियंत्रण हेतु क्षेत्र घनत्व परीक्षण का क्या महत्व है?