शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)
सिविल इंजीनियरिंग विभाग — मृदा यांत्रिकी प्रयोगशाला (Soil
Mechanics Laboratory)
मृदा के जल-अंश (Water Content) ज्ञात
करने की ओवन शुष्कन विधि
(Oven Drying Method — IS : 2720 (Part II) – 1973,
Reaffirmed)
1. उद्देश्य (Aim)
भारतीय मानक कोड IS : 2720 (Part II) – 1973 "Methods of Test for
Soils — Determination of Water Content" के अनुसार, ओवन शुष्कन विधि (Oven
Drying Method) द्वारा किसी दी गई मृदा प्रतिदर्श (soil sample) के जल-अंश (water
content) को प्रयोगशाला में ज्ञात करना।
2. सिद्धांत (Principle)
मृदा का जल-अंश (w) मृदा में उपस्थित जल के भार तथा मृदा के शुष्क कणों
(solid particles) के भार के अनुपात को प्रतिशत में व्यक्त करता है। मृदा के गीले प्रतिदर्श
को 110 ± 5°C ताप पर ओवन में तब तक शुष्क किया जाता है जब तक उसका भार स्थिर
(constant mass) न हो जाए। इस प्रक्रिया में वाष्पीकृत हुए जल के भार तथा शुष्क मृदा
के भार से जल-अंश की गणना की जाती है।
w (%) = [(W₂ − W₃) / (W₃ − W₁)] × 100
जहां — W₁ = खाली पात्र (ढक्कन सहित) का भार, W₂ = गीली मृदा सहित पात्र (ढक्कन
सहित) का भार, W₃ = ओवन-शुष्क मृदा सहित पात्र (ढक्कन सहित) का भार।
3. उपकरण एवं सामग्री (Apparatus)
●
वायुरोधी
(air-tight), संक्षारण-रहित (non-corrodible) धातु का पात्र, ढक्कन सहित
(Container with lid)।
●
तापस्थायी नियंत्रित ओवन
(Thermostatically controlled oven) — ताप परास 105°C से 110°C (सामान्यतः 110 ±
5°C बनाए रखा जाता है)।
●
तौल-यंत्र/तुला
(Balance) — उपयुक्त संवेदनशीलता (sensitivity) सहित (नीचे तालिका देखें)।
●
निर्जलीकारक/डेसीकेटर
(Desiccator) — शुष्क मृदा को ठंडा करने हेतु, ताकि वायुमंडलीय नमी पुनः अवशोषित न
हो।
●
चिमटा/टोंग्स (Tongs)
— गर्म पात्र को पकड़ने हेतु।
|
प्रतिदर्श
का भार |
तुला
की न्यूनतम संवेदनशीलता (Sensitivity) |
|
200 g से कम |
0.01 g |
|
200 g से 1000 g तक |
0.1 g |
|
1000 g से अधिक |
1 g |
4. प्रतिदर्श की मात्रा (Quantity of Soil Specimen)
मृदा प्रतिदर्श संपूर्ण मृदा-राशि (soil mass) का प्रतिनिधि
(representative) होना चाहिए। प्रतिदर्श की न्यूनतम मात्रा कणों के अधिकतम आकार
(maximum particle size) पर निर्भर करती है, जो निम्नानुसार है —
|
कणों
का अधिकतम आकार (Max. Particle Size) |
प्रतिदर्श
की न्यूनतम मात्रा |
|
425 माइक्रोन (0.425 mm) से छोटा — महीन दाने वाली मृदा |
25 g |
|
2 mm (425 माइक्रोन पर 10% से अधिक न रुके) |
50 g |
|
4.75 mm (2 mm पर 10% से अधिक न रुके) |
200 g |
|
10 mm (4.75 mm पर 10% से अधिक न रुके) |
300 g |
|
20 mm (10 mm पर 10% से अधिक न रुके) |
500 g |
|
40 mm (20 mm पर 10% से अधिक न रुके) |
1000 g |
5. प्रयोग विधि (Procedure)
1.
पात्र (container) को
साफ करें, सुखाएं तथा ढक्कन सहित उसका भार ज्ञात करें और इसे W₁ अंकित करें।
2.
क्षेत्र से प्राप्त प्रातिनिधिक
(representative) गीली मृदा का उपयुक्त मात्रा (उपरोक्त तालिका अनुसार) का प्रतिदर्श
लेकर पात्र में ढीला-ढाला रखें, ताकि वाष्पीकरण सुगमता से हो सके।
3.
ढक्कन सहित पात्र व गीली
मृदा का संयुक्त भार ज्ञात कर W₂ अंकित करें।
4.
पात्र से ढक्कन हटाकर,
पात्र व मृदा को तापस्थायी नियंत्रित ओवन में रखें तथा ओवन का ताप 110 ± 5°C पर बनाए
रखें।
5.
प्रतिदर्श को लगभग
16–24 घंटे तक अथवा स्थिर भार (constant mass) प्राप्त होने तक ओवन में शुष्क होने
दें।
6.
निर्धारित अवधि पश्चात
पात्र को ओवन से बाहर निकालें, ढक्कन पुनः लगाएं तथा डेसीकेटर में कमरे के तापमान तक
ठंडा करें।
7.
ठंडा होने पर ढक्कन सहित
पात्र व शुष्क मृदा का भार ज्ञात कर W₃ अंकित करें।
8.
परिणाम की पुष्टि हेतु
पात्र को पुनः 3–4 घंटे के लिए ओवन में रखकर दोबारा तौलें — यदि लगातार दो तौल में
भार का अंतर प्रारंभिक शुष्क भार के 0.1% से कम हो, तो स्थिर भार (constant mass) प्राप्त
मानें।
9.
यही प्रक्रिया कम-से-कम
तीन प्रतिदर्शों पर दोहराकर औसत जल-अंश ज्ञात करें।
6. प्रेक्षण सारणी (Observation Table — प्रयोगशाला हेतु प्रारूप)
|
क्र. |
विवरण
(Description) |
प्रतिदर्श
1 |
प्रतिदर्श
2 |
प्रतिदर्श
3 |
|
1 |
पात्र क्रमांक (Container No.) |
|
|
|
|
2 |
खाली पात्र (ढक्कन सहित) का भार, W₁ (g) |
|
|
|
|
3 |
पात्र + गीली मृदा (ढक्कन सहित) का भार, W₂ (g) |
|
|
|
|
4 |
पात्र + शुष्क मृदा (ढक्कन सहित) का भार, W₃ (g) |
|
|
|
|
5 |
जल का भार = (W₂ − W₃) (g) |
|
|
|
|
6 |
शुष्क मृदा का भार = (W₃ − W₁) (g) |
|
|
|
|
7 |
जल-अंश, w (%) = [(W₂−W₃)/(W₃−W₁)] × 100 |
|
|
|
गणना का उदाहरण (Solved Example — छात्रों हेतु)
मान लीजिए किसी प्रतिदर्श में: W₁ = 20.00 g, W₂ = 70.00 g, W₃ = 60.00 g है।
जल का भार = W₂ − W₃ = 70.00 − 60.00 = 10.00 g
शुष्क मृदा का भार = W₃ − W₁ = 60.00 − 20.00 = 40.00 g
w = (10.00 / 40.00) × 100 = 25%
7. परिणाम की रिपोर्टिंग (Reporting of Result)
●
तीनों (अथवा अधिक) प्रतिदर्शों
से प्राप्त जल-अंश मानों का औसत लेकर अंतिम जल-अंश दो सार्थक अंकों (two
significant figures) तक रिपोर्ट किया जाता है।
●
परिणाम को इस प्रकार रिपोर्ट
करें — "मृदा प्रतिदर्श का जल-अंश (w) = ____ % (IS: 2720 Part II – 1973 अनुसार
ओवन शुष्कन विधि से)"।
8. विशेष प्रावधान — जिप्सम/कार्बनिक मृदा (Special
Provision — Gypsum/Organic Soils)
जिप्सम
(gypsum) अथवा अन्य जल-योजन (water of hydration) युक्त खनिजों वाली मृदा, अथवा कार्बनिक
पदार्थ (organic matter) की महत्वपूर्ण मात्रा वाली मृदा के लिए 110 ± 5°C पर ओवन-शुष्कन
विश्वसनीय जल-अंश मान नहीं देता, क्योंकि इससे रासायनिक जल अथवा कार्बनिक पदार्थ की
भी हानि हो सकती है। ऐसी मृदाओं हेतु ओवन का ताप 60°C से 80°C के मध्य रखा जाना चाहिए।
9. सावधानियां (Precautions)
●
गीली मृदा को पात्र में
ढीला-ढाला रखें, दबाकर न भरें, ताकि नमी समान रूप से वाष्पित हो सके।
●
ओवन से पात्र निकालते
समय चिमटे व दस्ताने (gloves) का उपयोग करें।
●
शुष्क मृदा को खुले वातावरण
में ठंडा न करें — केवल डेसीकेटर में ही ठंडा करें, अन्यथा यह वायुमंडलीय नमी पुनः
अवशोषित कर लेगी।
●
पात्र व ढक्कन पर एक ही
पहचान क्रमांक (identification number) अंकित हो, यह सुनिश्चित करें।
●
अत्यधिक ताप
(overheating) से बचें, क्योंकि इससे मृदा-कणों का अपघटन (decomposition) हो सकता है।
●
तौल शीघ्रता से करें,
ताकि पात्र वायुमंडलीय नमी अवशोषित करने से पूर्व तौला जा सके।
10. सिविल इंजीनियरिंग में जल-अंश का महत्व (Engineering
Significance)
●
मृदा के दाब वहन क्षमता
(bearing capacity), संहनन (compaction), संपीडनशीलता (compressibility) एवं अपरूपण
सामर्थ्य (shear strength) का निर्धारण जल-अंश पर निर्भर करता है।
●
तटबंध, सड़क एवं बांध
निर्माण में मृदा के क्षेत्र संहनन (field compaction) की गुणवत्ता नियंत्रण
(quality control) हेतु — प्राप्त जल-अंश की तुलना इष्टतम नमी अंश (Optimum
Moisture Content, OMC — प्रॉक्टर परीक्षण से प्राप्त) से की जाती है।
●
नींव अभिकल्पन, ढाल स्थिरता
विश्लेषण (slope stability analysis) तथा द्रवीकरण (liquefaction) क्षमता के आकलन हेतु
जल-अंश एक मूल आंकड़ा है।
●
आर्द्रता सीमा
(Atterberg limits — तरलता सीमा, प्लास्टिकता सीमा) के परीक्षणों में भी जल-अंश निर्धारण
की यही मूल विधि प्रयुक्त होती है।
अभ्यास
हेतु प्रश्न: (1) IS 2720 (Part II) के अनुसार जल-अंश ज्ञात करने की ओवन शुष्कन विधि
का सिद्धांत, उपकरण व प्रक्रिया सचित्र वर्णन कीजिए। (2) प्रतिदर्श की मात्रा कणों
के आकार पर किस प्रकार निर्भर करती है, तालिका सहित समझाइए। (3) यदि W₁ = 25 g, W₂
= 85 g, W₃ = 70 g हो तो जल-अंश ज्ञात कीजिए। (4) जिप्सम व कार्बनिक मृदा के लिए ओवन-शुष्कन
विधि में क्या विशेष सावधानी आवश्यक है, और क्यों? (5) सिविल इंजीनियरिंग निर्माण-कार्यों
में मृदा जल-अंश के महत्व पर टिप्पणी लिखिए।
No comments:
Post a Comment