शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)
सिविल इंजीनियरिंग विभाग — मृदा यांत्रिकी प्रयोगशाला (Soil
Mechanics Laboratory)
मृदा का विशिष्ट गुरुत्व (Specific
Gravity) ज्ञात करने की पिकनॉमीटर विधि
(Pycnometer Method — IS : 2720 (Part III / Section 2) –
1980, Reaffirmed)
1. उद्देश्य (Aim)
भारतीय मानक कोड IS : 2720 (Part III/Section 2) – 1980 "Methods of
Test for Soils — Determination of Specific Gravity, Fine, Medium and Coarse
Grained Soils" के अनुसार, पिकनॉमीटर विधि (Pycnometer Method) द्वारा मृदा कणों
(soil solids) का विशिष्ट गुरुत्व (Gs) ज्ञात करना।
2. परिभाषा (Definition)
मृदा कणों का विशिष्ट गुरुत्व (Gs), किसी निश्चित ताप पर मृदा कणों के दिए
गए आयतन के भार तथा उतने ही आयतन के वायु-रहित आसुत जल (air-free distilled water)
के भार के अनुपात को कहते हैं। यह एक विमाहीन (dimensionless) राशि है।
Gs = मृदा कणों का भार / समान आयतन जल का भार (27°C पर)
सामान्य मृदाओं (बालू, गाद, मृत्तिका) का विशिष्ट गुरुत्व प्रायः 2.65 से
2.80 के मध्य होता है; कार्बनिक मृदाओं का Gs 2.0 से कम तथा भारी खनिजयुक्त मृदाओं
(जैसे लैटेराइट) का Gs 3.0 से अधिक भी हो सकता है।
3. सिद्धांत (Principle)
ज्ञात भार की शुष्क मृदा को पिकनॉमीटर में भरकर, उसमें जल मिलाकर वायु-रहित
(de-aired) किया जाता है। पिकनॉमीटर में उपस्थित मृदा द्वारा विस्थापित जल के आयतन
की गणना कर, मृदा के आयतन तथा भार के अनुपात से विशिष्ट गुरुत्व ज्ञात किया जाता है।
4. उपकरण (Apparatus)
●
पिकनॉमीटर
(Pycnometer) — लगभग 900 ml से 1000 ml क्षमता का, पीतल के शंक्वाकार टोपी
(conical brass cap) व रबर वाशर सहित — टोपी में एक छोटा छिद्र (small hole) होता है
जिससे अतिरिक्त जल बाहर निकलता है।
●
तौल-यंत्र/तुला
(Balance) — 1 g सटीकता (accuracy) सहित।
●
वायु-निष्कासन पंप/निर्वात
पंप (Vacuum Pump) अथवा उबालने की व्यवस्था — मृदा-जल मिश्रण से फंसी हुई वायु निकालने
हेतु।
●
कांच की छड़ (Glass
Rod) — मृदा को हिलाने (stirring) हेतु।
●
तापस्थायी नियंत्रित ओवन
(Oven) — 105°C से 110°C, मृदा को शुष्क करने हेतु।
●
4.75 mm IS छलनी
(sieve) — प्रतिदर्श तैयार करने हेतु।
●
थर्मामीटर, वॉश बॉटल,
फिल्टर पेपर।
5. प्रतिदर्श की मात्रा (Quantity of Specimen)
पिकनॉमीटर विधि मुख्यतः मध्यम व स्थूल दानेदार (medium and coarse
grained) मृदाओं — अर्थात 4.75 mm छलनी पर रुकने वाले अंश सहित मृदाओं — हेतु प्रयुक्त
होती है। (महीन दाने वाली मृदाओं, अर्थात 2 mm छलनी से पूर्णतः गुजरने वाली मृदाओं
हेतु 50 ml घनत्व बोतल/Density Bottle विधि — IS 2720 Part III/Section 1 — प्रयुक्त
होती है।)
|
मृदा
का प्रकार |
प्रतिदर्श
की मात्रा |
|
महीन दाने वाली मृदा (Fine-grained) |
200 g (यद्यपि इस हेतु सामान्यतः Density Bottle विधि प्रयुक्त
होती है) |
|
मध्यम व स्थूल दाने वाली मृदा (Medium &
Coarse-grained, 4.75 mm पर रुकने वाला अंश) |
200 g से 300 g (शुष्क मृदा, 4.75 mm छलनी से गुजरा हुआ) |
6. प्रयोग विधि (Procedure)
1.
पिकनॉमीटर को साफ करें,
सुखाएं तथा टोपी सहित उसका भार ज्ञात करें और इसे W₁ अंकित करें (खाली पिकनॉमीटर का
भार)।
2.
लगभग 200 g से 300 g ओवन-शुष्क
मृदा (4.75 mm छलनी से गुजरी हुई) को पिकनॉमीटर में डालकर, टोपी सहित उसका भार ज्ञात
करें और W₂ अंकित करें (पिकनॉमीटर + शुष्क मृदा का भार)।
3.
मृदा को ढकने हेतु पर्याप्त
आसुत जल पिकनॉमीटर में डालें तथा टोपी कस दें। पिकनॉमीटर को भली-भांति हिलाएं ताकि
मृदा-कण जल में अच्छी तरह मिश्रित हो जाएं।
4.
पिकनॉमीटर को निर्वात
पंप (vacuum pump) से जोड़कर लगभग 10 से 20 मिनट तक वायु-निष्कासन करें, ताकि मृदा-कणों
के मध्य फंसी वायु पूर्णतः निकल जाए (वैकल्पिक रूप से, मिश्रण को धीरे-धीरे उबालकर
भी वायु निकाली जा सकती है)।
5.
वायु-निष्कासन के पश्चात
पिकनॉमीटर को आसुत जल से पूर्णतः भर दें (टोपी के छिद्र से अतिरिक्त जल बाहर निकल जाएगा),
बाहरी सतह को भली-भांति सुखाएं तथा भार ज्ञात कर W₃ अंकित करें (पिकनॉमीटर + मृदा
+ जल का भार)।
6.
पिकनॉमीटर को भली-भांति
साफ करें, तथा उसे केवल आसुत जल से (टोपी तक) पूर्णतः भरकर भार ज्ञात करें और W₄ अंकित
करें (पिकनॉमीटर + केवल जल का भार, उसी ताप पर)।
7.
संपूर्ण प्रयोग के दौरान
जल का ताप स्थिर (आदर्शतः 27°C) बनाए रखें, अथवा प्राप्त परिणाम में आवश्यक ताप-सुधार
(temperature correction) लागू करें।
8.
परिणाम की विश्वसनीयता
हेतु न्यूनतम दो प्रतिदर्शों पर प्रयोग दोहराएं — दोनों में Gs का अंतर 0.03 से अधिक
होने पर तीसरा प्रतिदर्श लें।
7. गणना — सूत्र (Calculation — Formula)
Gs = (W₂ − W₁) / [(W₂ − W₁) − (W₃ − W₄)]
जहां — W₁ = खाली पिकनॉमीटर का भार, W₂ = पिकनॉमीटर + शुष्क मृदा का भार,
W₃ = पिकनॉमीटर + मृदा + जल (वायु-रहित, पूर्ण भरा हुआ) का भार, W₄ = पिकनॉमीटर + केवल
जल (पूर्ण भरा हुआ) का भार।
व्याख्या: (W₂ − W₁) = शुष्क मृदा का भार (Ws); [(W₂ − W₁) − (W₃ − W₄)] =
मृदा-कणों द्वारा विस्थापित जल का भार, जो कि मृदा-कणों के आयतन के समतुल्य जल के भार
को दर्शाता है।
8. प्रेक्षण सारणी (Observation Table — प्रयोगशाला हेतु प्रारूप)
|
क्र. |
विवरण
(Description) |
प्रतिदर्श
1 |
प्रतिदर्श
2 |
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1 |
पिकनॉमीटर क्रमांक |
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2 |
खाली पिकनॉमीटर का भार, W₁ (g) |
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3 |
पिकनॉमीटर + शुष्क मृदा का भार, W₂ (g) |
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4 |
पिकनॉमीटर + मृदा + जल का भार, W₃ (g) |
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|
|
5 |
पिकनॉमीटर + केवल जल का भार, W₄ (g) |
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6 |
शुष्क मृदा का भार, (W₂ − W₁) (g) |
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7 |
विस्थापित जल का भार, [(W₂−W₁) − (W₃−W₄)] (g) |
|
|
|
8 |
विशिष्ट गुरुत्व, Gs |
|
|
गणना का उदाहरण (Solved Example — छात्रों हेतु)
मान लीजिए: W₁ = 620 g, W₂ = 870 g, W₃ = 1755 g, W₄ = 1610 g है।
शुष्क मृदा का भार = W₂ − W₁ = 870 − 620 = 250 g
(W₃ − W₄) = 1755 − 1610 = 145 g
विस्थापित जल का भार = 250 − 145 = 105 g
Gs = 250 / 105 = 2.38
टिप्पणी:
उपरोक्त उदाहरण केवल सूत्र के अनुप्रयोग को समझाने हेतु है। वास्तविक मृदा-प्रतिदर्शों
में सामान्यतः Gs का मान 2.65 से 2.80 के मध्य प्राप्त होना अपेक्षित है।
9. परिणाम की रिपोर्टिंग (Reporting of Result)
●
Gs का मान 27°C ताप पर,
निकटतम 0.01 तक रिपोर्ट किया जाता है।
●
दो अथवा अधिक प्रतिदर्शों
से प्राप्त मानों का औसत अंतिम परिणाम माना जाता है।
●
यदि प्रयोग 27°C से भिन्न
ताप पर किया गया हो, तो उपयुक्त ताप-सुधार गुणांक (temperature correction factor)
लागू कर परिणाम को 27°C के संगत मान में परिवर्तित करें।
10. सावधानियां (Precautions)
●
मृदा-जल मिश्रण से वायु
का पूर्ण निष्कासन सुनिश्चित करें — फंसी हुई वायु परिणाम को अशुद्ध बना देती है
(Gs का मान वास्तविक से कम प्राप्त होता है)।
●
पिकनॉमीटर की बाहरी सतह
को तौलने से पूर्व भली-भांति सुखाएं।
●
संपूर्ण प्रयोग के दौरान
जल का ताप यथासंभव स्थिर रखें।
●
टोपी कसते समय पिकनॉमीटर
के अंदर वायु-बुलबुला न रहे, यह सुनिश्चित करें।
●
प्रसार-शील
(expansive/swelling) अथवा उच्च क्रियाशील मृदाओं हेतु जल के स्थान पर केरोसिन
(kerosene) का उपयोग करें, ताकि मृदा-कणों में जलयोजन (hydration) से त्रुटि न हो।
●
प्रतिदर्श को छलनी से
भली-भांति चालकर 4.75 mm से बड़े कणों को अलग करें।
11. सिविल इंजीनियरिंग में महत्व (Engineering
Significance)
●
मृदा के रिक्तिका अनुपात
(void ratio, e), सरंध्रता (porosity, n) एवं संतृप्ति की मात्रा (degree of
saturation, S) की गणना हेतु Gs एक आवश्यक आधारभूत मान है।
●
प्रॉक्टर संहनन वक्र
(Proctor compaction curve) पर शून्य वायु-रिक्तिका वक्र (Zero Air Voids curve) खींचने
हेतु Gs आवश्यक है।
●
मृदा के भार-आयतन संबंध
(phase relationships), शुष्क घनत्व (dry density) व एकक भार (unit weight) की गणना
में उपयोग।
●
हाइड्रोमीटर विश्लेषण
(hydrometer analysis) द्वारा कणीय संरचना (grain size distribution) ज्ञात करने में
भी Gs आवश्यक है।
●
मृदा के प्रकार व खनिज
संगठन के प्रारंभिक अनुमान (indication) हेतु उपयोगी।
12. विभिन्न मृदाओं का सामान्य विशिष्ट गुरुत्व (Typical
Values)
|
मृदा
का प्रकार |
विशिष्ट
गुरुत्व (Gs) — सामान्य परास |
|
बालू (Sand) |
2.65 – 2.67 |
|
गादयुक्त मृदा (Silt) |
2.67 – 2.70 |
|
अकार्बनिक मृत्तिका (Inorganic Clay) |
2.70 – 2.80 |
|
कार्बनिक मृदा (Organic Soil) |
2.00 से कम |
|
लैटेराइट/भारी खनिजयुक्त मृदा |
3.00 से अधिक |
अभ्यास हेतु प्रश्न: (1) IS 2720 (Part III/Section 2) के अनुसार पिकनॉमीटर विधि द्वारा मृदा का विशिष्ट गुरुत्व ज्ञात करने की विधि सचित्र वर्णन कीजिए। (2) विशिष्ट गुरुत्व ज्ञात करने का सूत्र स्थापित कीजिए तथा प्रत्येक पद को स्पष्ट कीजिए। (3) यदि W₁ = 600 g, W₂ = 800 g, W₃ = 1700 g, W₄ = 1560 g हो तो Gs ज्ञात कीजिए। (4) पिकनॉमीटर विधि व घनत्व बोतल (Density Bottle) विधि में क्या अंतर है? (5) मृदा-कणों के विशिष्ट गुरुत्व का सिविल इंजीनियरिंग में क्या महत्व है?
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