Tuesday, 1 September 2026

मृदा का क्षेत्र घनत्व (Field Density) ज्ञात करने की कोर कटर विधि

                           शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)

सिविल इंजीनियरिंग विभाग — मृदा यांत्रिकी प्रयोगशाला (Soil Mechanics Laboratory)

मृदा का क्षेत्र घनत्व (Field Density) ज्ञात करने की कोर कटर विधि

(Core Cutter Method — IS : 2720 (Part 29) – 1975, Reaffirmed)

1. उद्देश्य (Aim)

भारतीय मानक कोड IS : 2720 (Part 29) – 1975 "Methods of Test for Soils — Determination of Dry Density of Soils, In-Place, by the Core-Cutter Method" के अनुसार, कोर कटर विधि (Core Cutter Method) द्वारा क्षेत्र (in-situ) में संहनित/प्राकृतिक मृदा का क्षेत्र घनत्व (Field Density) एवं शुष्क घनत्व (Dry Density) ज्ञात करना।

2. कार्यक्षेत्र/उपयोगिता (Scope)

यह विधि मुख्यतः महीन दाने वाली, संसंजक (cohesive), समांगी (homogeneous) एवं कंकड़-पत्थर (gravel/aggregation) रहित मृदाओं हेतु उपयुक्त है, जिनमें कटर आसानी से गाड़ा (drive) जा सके। कठोर, बजरीयुक्त (gravelly) अथवा शिलाखंडयुक्त (boulder) मृदाओं में इस विधि का प्रयोग संभव नहीं है — ऐसी मृदाओं हेतु रेत प्रतिस्थापन विधि (Sand Replacement Method — IS 2720 Part 28) अधिक उपयुक्त एवं शुद्ध मानी जाती है।

3. परिभाषाएं (Definitions)

  • क्षेत्र घनत्व/आर्द्र घनत्व (Bulk/Field Density, ρ) — मृदा के इकाई आयतन का कुल भार (जल सहित)।

  • शुष्क घनत्व (Dry Density, ρd) — मृदा के इकाई (कुल) आयतन में उपस्थित केवल ठोस कणों का भार।

  • क्षेत्र में मृदा का घनत्व, संहनन की गुणवत्ता (compaction quality control), भार वहन क्षमता एवं स्थिरता विश्लेषण हेतु आवश्यक एक मूल आंकड़ा है।

4. उपकरण (Apparatus)

  • बेलनाकार कोर कटर (Cylindrical Core Cutter) — स्टील का, दोनों सिरों पर खुला — सामान्य आंतरिक व्यास लगभग 100 mm तथा ऊंचाई लगभग 130 mm (आयतन ≈ 1000 cm³)।

  • स्टील डॉली (Steel Dolly) — कटर के ऊपर रखकर हथौड़े की चोट कटर तक समान रूप से पहुंचाने हेतु।

  • स्टील रैमर (Steel Rammer) — कटर को मृदा में गाड़ने (driving) हेतु।

  • तौल-यंत्र/तुला (Balance) — 1 g सटीकता, क्षमता लगभग 15 kg।

  • सीधी धार/स्ट्रेट एज (Straight Edge) — अतिरिक्त मृदा को समतल काटने हेतु।

  • वर्गाकार धातु ट्रे (Square Metal Tray) — लगभग 300 mm × 300 mm × 40 mm आकार की।

  • कुदाल/फावड़ा (Spade/Pickaxe), खुरपी/ट्रॉवेल (Trowel), चाकू (Knife)।

  • जल-अंश ज्ञात करने हेतु उपकरण — IS: 2720 (Part II)-1973 अनुसार (ओवन, तौल-यंत्र, कंटेनर आदि)।

5. प्रयोग विधि (Procedure)

  1. कोर कटर के आंतरिक व्यास (d) व ऊंचाई (h) को निकटतम 0.25 mm तक मापें तथा कटर का आंतरिक आयतन (Vc) परिकलित करें।

  2. कोर कटर को साफ करें तथा उसका भार ज्ञात कर W₁ अंकित करें (खाली कटर का भार)।

  3. जिस स्थल पर परीक्षण करना हो, वहां मृदा की सतह से ढीली मिट्टी, वनस्पति, कंकड़ आदि हटाकर लगभग 30 cm × 30 cm क्षेत्रफल का भाग समतल (level) करें।

  4. स्टील डॉली को कटर के ऊपर रखें तथा रैमर की सहायता से कटर को लंबवत (vertically) मृदा में तब तक गाड़ें, जब तक डॉली का लगभग 15 mm भाग सतह के ऊपर शेष रह जाए। कटर को गाड़ते समय हिलने (rocking) न दें।

  5. कटर के चारों ओर से फावड़े की सहायता से सावधानीपूर्वक खोदकर कटर को मृदा-प्रतिदर्श सहित बाहर निकालें, इस प्रकार कि दोनों सिरों से कुछ अतिरिक्त मृदा बाहर की ओर निकली रहे।

  6. डॉली हटाएं तथा कटर के दोनों (ऊपरी व निचले) सिरों पर स्ट्रेट एज/चाकू से अतिरिक्त मृदा को सावधानीपूर्वक इस प्रकार काटें कि कटर के भीतर मृदा का आयतन ठीक कटर के आंतरिक आयतन (Vc) के बराबर हो जाए।

  7. कटर व उसमें भरी हुई गीली मृदा का संयुक्त भार ज्ञात कर W₂ अंकित करें (कटर + गीली मृदा का भार)।

  8. कटर से मृदा का एक प्रातिनिधिक (representative) भाग निकालकर, उसका जल-अंश (w%) IS 2720 (Part II) की ओवन शुष्कन विधि से ज्ञात करें।

  9. इसी प्रक्रिया को स्थल के कम-से-कम तीन भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर दोहराकर औसत क्षेत्र घनत्व ज्ञात करें।

6. गणना — सूत्र (Calculation — Formula)

कटर का आयतन: Vc = (π/4) × d² × h

आर्द्र/क्षेत्र घनत्व: ρ = (W₂ − W₁) / Vc

शुष्क घनत्व: ρd = ρ × 100 / (100 + w)

जहां — d = कटर का आंतरिक व्यास, h = कटर की ऊंचाई, W₁ = खाली कटर का भार, W₂ = कटर + गीली मृदा का भार, w = मृदा का जल-अंश (प्रतिशत में)।

संहनन की मात्रा (Degree of Compaction) = (क्षेत्र में शुष्क घनत्व / प्रयोगशाला में अधिकतम शुष्क घनत्व MDD) × 100%

7. प्रेक्षण सारणी (Observation Table — प्रयोगशाला हेतु प्रारूप)

क्र.

विवरण (Description)

प्रतिदर्श 1

प्रतिदर्श 2

प्रतिदर्श 3

1

कटर का आंतरिक व्यास, d (cm)




2

कटर की ऊंचाई, h (cm)




3

कटर का आयतन, Vc = (π/4)d²h (cm³)




4

खाली कटर का भार, W₁ (g)




5

कटर + गीली मृदा का भार, W₂ (g)




6

गीली मृदा का भार = (W₂ − W₁) (g)




7

आर्द्र घनत्व, ρ = (W₂−W₁)/Vc (g/cm³)




8

जल-अंश, w (%)




9

शुष्क घनत्व, ρd = ρ×100/(100+w) (g/cm³)





गणना का उदाहरण (Solved Example — छात्रों हेतु)

मान लीजिए: कटर का व्यास d = 10 cm, ऊंचाई h = 12.73 cm, W₁ = 1500 g, W₂ = 3480 g, जल-अंश w = 12%।

कटर का आयतन Vc = (π/4) × 10² × 12.73 ≈ 1000 cm³

गीली मृदा का भार = W₂ − W₁ = 3480 − 1500 = 1980 g

आर्द्र घनत्व, ρ = 1980 / 1000 = 1.98 g/cm³

शुष्क घनत्व, ρd = 1.98 × 100 / (100 + 12) = 1.77 g/cm³

8. सावधानियां (Precautions)

  • कटर को गाड़ते समय हथौड़े/रैमर की चोट डॉली के केंद्र पर लंबवत लगाएं, ताकि कटर तिरछा (tilted) न हो।

  • कटर को अत्यधिक बल से न गाड़ें, अन्यथा मृदा-कण संकुचित (disturbed/compressed) होकर वास्तविक घनत्व से भिन्न परिणाम देंगे।

  • मृदा-सतह अत्यधिक शुष्क अथवा अत्यधिक कठोर होने पर कटर को गाड़ने से पूर्व स्थल को हल्का ढीला करना आवश्यक हो सकता है — परंतु इससे परिणाम की शुद्धता प्रभावित हो सकती है, अतः सावधानी आवश्यक है।

  • कटर के दोनों सिरों पर मृदा को इस प्रकार काटें कि भीतर मृदा का आयतन ठीक कटर के आंतरिक आयतन के बराबर रहे — अतिरिक्त दबाव से मृदा संकुचित न हो।

  • कंकड़/बजरीयुक्त अथवा अत्यधिक शुष्क, भंगुर (crumbling) मृदा में यह विधि उपयुक्त नहीं — ऐसी दशाओं में रेत प्रतिस्थापन विधि अपनाएं।

  • प्रतिदर्श निकालने के तुरंत पश्चात तौल कर लें, ताकि वाष्पीकरण से जल-अंश में त्रुटि न हो।

9. विधि की सीमाएं (Limitations)

  • यह विधि केवल महीन दाने वाली, संसंजक (cohesive) मृदाओं तक सीमित है; बालू व बजरीयुक्त मृदाओं हेतु अनुपयुक्त है।

  • कटर गाड़ते समय मृदा का संकुचन (compression) या विक्षोभ (disturbance) होने की संभावना रहती है, जिससे परिणाम रेत प्रतिस्थापन विधि की तुलना में अपेक्षाकृत कम शुद्ध (less accurate) माना जाता है।

  • अत्यधिक कठोर, शुष्क अथवा शिलाखंडयुक्त मृदा में कटर को गाड़ना कठिन अथवा असंभव होता है।

10. सिविल इंजीनियरिंग में महत्व (Engineering Significance)

  • तटबंध (embankment), सड़क उप-आधार (subgrade) एवं बांध निर्माण में संहनन (compaction) की गुणवत्ता नियंत्रण (quality control) हेतु — क्षेत्र में प्राप्त शुष्क घनत्व की तुलना प्रयोगशाला में प्रॉक्टर परीक्षण (IS 2720 Part 7/8) से प्राप्त अधिकतम शुष्क घनत्व (MDD) से की जाती है।

  • मृदा की भार वहन क्षमता (bearing capacity), ढाल स्थिरता विश्लेषण (slope stability analysis) तथा भूमिगत संरचनाओं के अभिकल्पन हेतु क्षेत्र घनत्व एक आवश्यक आंकड़ा है।

  • संहनित परत (compacted layer) को स्वीकृत करने अथवा अस्वीकृत करने का निर्णय संहनन की मात्रा (percentage compaction, सामान्यतः 95–98% MDD अपेक्षित) के आधार पर लिया जाता है।

अभ्यास हेतु प्रश्न: (1) IS 2720 (Part 29) के अनुसार कोर कटर विधि द्वारा क्षेत्र घनत्व ज्ञात करने की विधि सचित्र वर्णन कीजिए। (2) आर्द्र घनत्व व शुष्क घनत्व ज्ञात करने के सूत्र स्थापित कीजिए। (3) यदि कटर का व्यास 10 cm, ऊंचाई 13 cm, W₁ = 1480 g, W₂ = 3500 g तथा जल-अंश 15% हो तो शुष्क घनत्व ज्ञात कीजिए। (4) कोर कटर विधि व रेत प्रतिस्थापन विधि में क्या अंतर है, तथा प्रत्येक कहां उपयुक्त है? (5) सड़क एवं बांध निर्माण में संहनन गुणवत्ता नियंत्रण हेतु क्षेत्र घनत्व परीक्षण का क्या महत्व है?


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