शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)
सिविल इंजीनियरिंग विभाग — मृदा यांत्रिकी प्रयोगशाला (Soil
Mechanics Laboratory)
मृदा की तरलता सीमा (Liquid Limit) ज्ञात
करने की कासाग्रांडे उपकरण विधि
(Casagrande Apparatus Method — IS : 2720 (Part 5) – 1985,
Reaffirmed)
1. उद्देश्य (Aim)
भारतीय मानक कोड IS : 2720 (Part 5) – 1985 "Methods of Test for
Soils — Determination of Liquid and Plastic Limit" के अनुसार, कासाग्रांडे उपकरण
(Casagrande Apparatus) की सहायता से मृदा की तरलता सीमा (Liquid Limit, LL) ज्ञात
करना।
2. परिभाषा (Definition)
तरलता सीमा (Liquid Limit) वह न्यूनतम जल-अंश है जिस पर मृदा प्लास्टिक अवस्था
(plastic state) से तरल अवस्था (liquid state) में परिवर्तित हो जाती है — अर्थात मृदा
इतनी तरल हो जाती है कि मानक विधि से लगाए गए झटकों (blows) से खांचा (groove) बंद
हो जाता है, फिर भी मृदा में अल्प अपरूपण सामर्थ्य (small shear strength) शेष रहती
है।
तरलता सीमा,
अटरबर्ग सीमाओं (Atterberg Limits — तरलता सीमा, प्लास्टिकता सीमा, संकुचन सीमा) में
से एक है, जो सूक्ष्म-दानेदार (fine-grained) मृदाओं के वर्गीकरण व अभियांत्रिकी व्यवहार
के आकलन हेतु मूल आधार है।
3. उपकरण (Apparatus)
●
कासाग्रांडे तरलता सीमा
उपकरण (Casagrande Liquid Limit Device) — IS: 9259-1979 के अनुरूप, पीतल के कप
(brass cup), क्रेंक व कैम तंत्र (crank & cam mechanism) सहित, जो कप को निश्चित
ऊंचाई (10 mm) से गिराता है।
●
खांचा उपकरण
(Grooving Tool) — दो प्रकार: (i) मानक/कासाग्रांडे खांचा उपकरण — मृत्तिकायुक्त
(clayey) मृदा हेतु, खांचा: तल पर 2 mm चौड़ा, ऊपर 11 mm चौड़ा, 8 mm गहरा। (ii)
ASTM खांचा उपकरण — बलुई (sandy) मृदा हेतु, खांचा: तल पर 2 mm चौड़ा, ऊपर 13.6 mm
चौड़ा, 10 mm गहरा।
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तौल-यंत्र/तुला
(Balance) — क्षमता 500 g, संवेदनशीलता 0.01 g।
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तापस्थायी नियंत्रित ओवन
(Oven) — क्षमता 250°C तक (परीक्षण हेतु 105°C–110°C प्रयुक्त)।
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चीनी मिट्टी की वाष्पन
तश्तरी (Porcelain Evaporating Dish) — लगभग 12–15 cm व्यास।
●
नमनीय खुरपी/स्पैचुला
(Flexible Spatula) — फलक लंबाई ≈8 cm, चौड़ाई ≈2 cm।
●
पैलेट नाइफ (Palette
Knife) — फलक लंबाई ≈20 cm, चौड़ाई ≈3 cm।
●
425 माइक्रोन IS छलनी,
वॉश बॉटल, वायुरोधी पात्र (जल-अंश निर्धारण हेतु)।
4. प्रतिदर्श की तैयारी (Sample Preparation)
1.
क्षेत्र से प्राप्त मृदा-प्रतिदर्श
को वायु में सुखाएं; ढेले हों तो लकड़ी के मैलेट से तोड़ें तथा जड़ें/कार्बनिक पदार्थ
हटा दें।
2.
लगभग 120 g वायु-शुष्क
मृदा — जो 425 माइक्रोन IS छलनी से गुजरी हो — भली-भांति मिश्रित भाग से प्राप्त करें।
3.
इस मृदा को वाष्पन तश्तरी
में लेकर आसुत जल के साथ मिलाकर एकसमान लेई (uniform paste) बनाएं। तैयार पेस्ट को
वायुरोधी पात्र में लगभग 24 घंटे परिपक्व (mature/soak) होने दें, ताकि नमी संपूर्ण
मृदा में समान रूप से वितरित हो जाए।
5. प्रयोग विधि (Procedure)
1.
कासाग्रांडे उपकरण को
समतल दृढ़ आधार पर रखें तथा खांचा उपकरण की गेज (gauge) से जांच लें कि कप ठीक 10
mm (1 cm) की ऊंचाई से गिरता है, आवश्यकतानुसार समायोजित करें।
2.
तैयार पेस्ट का एक भाग
कप में रखें तथा स्पैचुला से कुछ स्ट्रोक में समतल फैलाएं, जिससे अधिकतम मोटाई के बिंदु
पर गहराई 1 cm हो जाए; अतिरिक्त मृदा वापस तश्तरी में डाल दें।
3.
खांचा उपकरण से कप के
केंद्र से होकर, फॉलोअर की केंद्र-रेखा के अनुदिश, दृढ़ स्ट्रोक द्वारा एक स्पष्ट व
नुकीला खांचा (groove) बनाएं, ताकि खांचे का आकार व माप उचित बना रहे।
4.
क्रेंक को लगभग 2 चक्कर
प्रति सेकंड की दर से घुमाकर कप को बारंबार गिराएं, जब तक खांचे के दोनों भाग केवल
प्रवाह (flow) द्वारा लगभग 12 mm लंबाई तक परस्पर स्पर्श न कर लें।
5.
खांचा बंद होने हेतु आवश्यक
झटकों (blows) की संख्या (N) अंकित करें।
6.
खांचे के बंद हुए भाग
के समीप से एक प्रातिनिधिक भाग लेकर उसका जल-अंश (w%) IS 2720 (Part II) की ओवन शुष्कन
विधि से ज्ञात करें।
7.
कप की शेष मृदा को तश्तरी
में वापस डालकर, थोड़ा और जल मिलाकर मिश्रण को अधिक तरल बनाएं (अथवा शुष्क कर कम तरल
बनाएं), तथा प्रक्रिया दोहराएं।
8.
इस प्रकार भिन्न-भिन्न
जल-अंशों पर परीक्षण दोहराकर न्यूनतम 4 से 5 प्रेक्षण प्राप्त करें, इस प्रकार कि झटकों
की संख्या 15 से 35 के मध्य वितरित हो (एक भी प्रेक्षण 15 से कम अथवा 35 से अधिक न
हो)।
परीक्षण
सदैव अधिक शुष्क (अधिक झटकों वाली) अवस्था से आरंभ कर क्रमशः अधिक तरल (कम झटकों वाली)
अवस्था की ओर बढ़ाया जाना चाहिए — इससे समय व श्रम की बचत होती है।
6. प्रेक्षण सारणी (Observation Table — प्रयोगशाला हेतु प्रारूप)
|
क्र. |
विवरण
(Description) |
प्रे.
1 |
प्रे.
2 |
प्रे.
3 |
प्रे.
4 |
|
1 |
पात्र क्रमांक |
|
|
|
|
|
2 |
झटकों की संख्या, N |
|
|
|
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3 |
खाली पात्र (ढक्कन सहित) का भार, W₁ (g) |
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|
4 |
पात्र + गीली मृदा का भार, W₂ (g) |
|
|
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|
|
5 |
पात्र + शुष्क मृदा का भार, W₃ (g) |
|
|
|
|
|
6 |
जल का भार = (W₂ − W₃) (g) |
|
|
|
|
|
7 |
शुष्क मृदा का भार = (W₃ − W₁) (g) |
|
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|
|
|
8 |
जल-अंश, w (%) = [(W₂−W₃)/(W₃−W₁)]×100 |
|
|
|
|
7. प्रवाह वक्र (Flow Curve — Graph)
प्राप्त आंकड़ों (N व w) को अर्ध-लघुगणकीय ग्राफ (semi-log graph) पर आलेखित
किया जाता है — X-अक्ष (लघुगणकीय पैमाना) पर झटकों की संख्या (N), तथा Y-अक्ष (सामान्य
पैमाना) पर जल-अंश (w%)। प्राप्त बिंदुओं से यथासंभव सीधी रेखा (best-fit straight
line) खींची जाती है, जिसे "प्रवाह वक्र" (Flow Curve) कहते हैं। N = 25
के संगत जल-अंश ही मृदा की तरलता सीमा (LL) है।

गणना का उदाहरण (Solved Example — ऊपर दिए ग्राफ के आधार पर)
|
झटकों
की संख्या, N |
जल-अंश,
w (%) |
|
15 |
42 |
|
20 |
38 |
|
28 |
33 |
|
35 |
30 |
उपरोक्त बिंदुओं से खींचे गए प्रवाह वक्र से, N = 25 के संगत जल-अंश प्राप्त
होता है:
तरलता सीमा, LL = 34.7% (निकटतम प्रथम दशमलव तक रिपोर्ट)
8. एक-बिंदु विधि (One-Point Method — वैकल्पिक त्वरित विधि)
यदि समय सीमित हो, तो कासाग्रांडे के अनुभवजन्य सूत्र से केवल एक प्रेक्षण
(जो 20 से 30 झटकों के मध्य हो) से भी तरलता सीमा का अनुमानित मान ज्ञात किया जा सकता
है — परंतु इसे मानक (चार-बिंदु) विधि का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, केवल त्वरित
सत्यापन हेतु उपयोगी है।
LL = w × (N/25)^0.121
जहां — w = परीक्षण में प्राप्त जल-अंश (%), N = उस परीक्षण में झटकों की संख्या।
9. परिणाम की रिपोर्टिंग (Reporting of Result)
●
N = 25 के संगत जल-अंश
को निकटतम पूर्णांक अथवा प्रथम दशमलव तक रिपोर्ट किया जाता है, जो मृदा की तरलता सीमा
(LL) कहलाती है।
●
प्रवाह वक्र न्यूनतम चार
बिंदुओं से होकर यथासंभव सीधी रेखा के रूप में खींचा जाना चाहिए।
10. सावधानियां (Precautions)
●
परीक्षण के दौरान कासाग्रांडे
उपकरण को समतल व दृढ़ सतह पर रखें, कंपन से बचाएं।
●
प्रत्येक परीक्षण से पूर्व
कप व खांचा उपकरण की गिरने की ऊंचाई (10 mm) गेज से जांच लें।
●
खांचा एक ही दृढ़ स्ट्रोक
में बनाएं — बार-बार खांचा उपकरण चलाने से खांचे का आकार बिगड़ सकता है।
●
क्रेंक को स्थिर गति
(2 चक्कर/सेकंड) से घुमाएं — अनियमित गति से गलत झटका-गणना होगी।
●
झटकों की संख्या 15 से
कम अथवा 35 से अधिक होने पर वह प्रेक्षण प्रवाह वक्र हेतु स्वीकार्य नहीं है, प्रयोग
दोहराएं।
●
जल-अंश निर्धारण हेतु
प्रतिदर्श खांचे के ठीक बंद हुए भाग के निकट से ही लें।
●
परीक्षण सदैव शुष्क (अधिक
N) से तरल (कम N) की ओर क्रमबद्ध रूप से करें, ताकि पेस्ट में क्रमिक रूप से जल मिलाना
पड़े, न कि सुखाना।
●
बलुई मृदा (जिसमें पर्याप्त
मृत्तिका न हो) हेतु ASTM खांचा उपकरण का उपयोग करें, मानक कासाग्रांडे उपकरण का नहीं।
11. सिविल इंजीनियरिंग में महत्व (Engineering
Significance)
●
मृदा वर्गीकरण (IS
1498 / USCS) — तरलता सीमा (LL) व प्लास्टिकता सीमा (PL) से प्राप्त प्लास्टिसिटी इंडेक्स
(PI = LL − PL) के आधार पर प्लास्टिसिटी चार्ट पर मृदा को CL, CI, CH आदि वर्गों में
वर्गीकृत किया जाता है।
●
नींव अभिकल्पन — उच्च
तरलता सीमा वाली मृदाएं (जैसे मृत्तिका) सामान्यतः अधिक संपीडनशील (compressible) व
कम भार वहन क्षमता वाली होती हैं, अतः विशेष नींव अभिकल्पन आवश्यक होता है।
●
तटबंध, सड़क उप-आधार व
बांध निर्माण हेतु मृदा की उपयुक्तता के प्रारंभिक आकलन में सहायक।
●
संगति सूचकांक
(Consistency Index) व द्रवता सूचकांक (Liquidity Index) की गणना — क्षेत्र में मृदा
की प्राकृतिक अवस्था (दृढ़, मृदु, तरल) के आकलन हेतु।
●
सूजन क्षमता
(swelling potential) व संकुचन (shrinkage) के प्रारंभिक अनुमान हेतु उपयोगी संकेतक।
अभ्यास
हेतु प्रश्न: (1) IS 2720 (Part 5) के अनुसार कासाग्रांडे उपकरण द्वारा मृदा की तरलता
सीमा ज्ञात करने की संपूर्ण विधि सचित्र वर्णन कीजिए। (2) प्रवाह वक्र (flow
curve) कैसे आलेखित किया जाता है तथा इससे तरलता सीमा कैसे ज्ञात की जाती है? (3) कासाग्रांडे
खांचा उपकरण व ASTM खांचा उपकरण में क्या अंतर है, तथा प्रत्येक कहां उपयुक्त है?
(4) एक-बिंदु विधि (One-Point Method) का सूत्र लिखिए तथा इसकी सीमाएं बताइए। (5) सिविल
इंजीनियरिंग में मृदा की तरलता सीमा के महत्व पर टिप्पणी लिखिए।
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