शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)
सिविल इंजीनियरिंग विभाग — मृदा यांत्रिकी प्रयोगशाला (Soil
Mechanics Laboratory)
मृदा का कणीय आकार वितरण (Particle
Size Distribution) ज्ञात करने की छलनी विश्लेषण विधि
(Sieve Analysis Method — IS : 2720 (Part 4) – 1985,
Reaffirmed)
1. उद्देश्य (Aim)
भारतीय मानक कोड IS : 2720 (Part 4) – 1985 "Methods of Test for
Soils — Grain Size Analysis" के अनुसार, छलनी विश्लेषण विधि (Sieve
Analysis) द्वारा मृदा के कणीय आकार वितरण (Particle Size Distribution) ज्ञात करना
तथा कणीय आकार वितरण वक्र (Grading Curve) आलेखित करना।
2. सिद्धांत (Principle)
मृदा-प्रतिदर्श को क्रमशः घटते हुए छिद्र-आकार (mesh size) की छलनियों की एक
श्रृंखला (nest) से गुजारा जाता है। प्रत्येक छलनी पर रुके हुए (retained) मृदा-कणों
का भार ज्ञात कर, कुल प्रतिदर्श भार के सापेक्ष प्रत्येक छलनी पर रुकी मृदा का प्रतिशत
तथा संचयी रूप से गुजरने वाली (percentage finer) मृदा का प्रतिशत ज्ञात किया जाता
है। इन मानों को अर्ध-लघुगणकीय (semi-log) ग्राफ पर आलेखित कर कणीय आकार वितरण वक्र
(grading curve) प्राप्त होता है, जो मृदा के वर्गीकरण व अभियांत्रिकी गुणों के आकलन
हेतु उपयोग होता है।
4.75
mm छलनी पर रुकने वाले स्थूल अंश (coarse fraction) हेतु शुष्क छलनी विश्लेषण (Dry
Sieving) तथा 4.75 mm से गुजरने व 75 माइक्रोन पर रुकने वाले महीन अंश (fine
fraction) हेतु आर्द्र छलनी विश्लेषण (Wet Sieving) प्रयुक्त होता है, विशेषकर जब मृदा-कण
मृत्तिका/गाद से लिपटे (coated) हों।
3. उपकरण (Apparatus)
●
IS छलनियों का समूह
(Nest of IS Sieves) —
○
स्थूल छलनियां
(Coarse Sieves): 100 mm, 75 mm, 19 mm, 10 mm, 4.75 mm।
○
महीन छलनियां (Fine
Sieves): 2 mm, 1 mm, 600 माइक्रोन, 425 माइक्रोन, 300 माइक्रोन, 212 माइक्रोन,
150 माइक्रोन, 75 माइक्रोन।
●
यांत्रिक छलनी शेकर
(Mechanical Sieve Shaker) — छलनियों को समान रूप से हिलाने हेतु।
●
तापस्थायी नियंत्रित ओवन
(Oven) — 105°C से 115°C।
●
तौल-यंत्र/तुला
(Balance) — प्रतिदर्श भार के 0.1% तक संवेदनशीलता सहित।
●
मोर्टार व रबर मूसल
(Mortar with Rubber Pestle) — मृदा-ढेलों को तोड़ने हेतु (कणों को न तोड़ें)।
●
ब्रश, ट्रे, वुडन मैलेट
(लकड़ी का हथौड़ा)।
●
आर्द्र छलनी हेतु — परिक्षेपक
अभिकर्मक (Dispersing Agent): सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट (2 g/लीटर जल) अथवा सोडियम
हाइड्रॉक्साइड + सोडियम कार्बोनेट (1 g + 1 g प्रति लीटर जल)।
4. प्रतिदर्श की मात्रा (Quantity of Specimen)
प्रतिदर्श की न्यूनतम मात्रा मृदा में उपस्थित कणों के अधिकतम आकार पर निर्भर
करती है, जो निम्नानुसार है —
|
कणों
का अधिकतम आकार (mm) |
प्रतिदर्श
की न्यूनतम मात्रा |
|
75 |
60 kg |
|
40 |
25 kg |
|
25 |
13 kg |
|
20 |
6.5 kg |
|
12.5 |
3.25 kg |
|
10 |
1.6 kg |
|
6.3 |
0.5 kg |
|
4.75 अथवा उससे छोटा |
0.2 kg (200 g) |
5. प्रयोग विधि (Procedure)
भाग-अ: प्रतिदर्श की तैयारी (Sample Preparation)
1.
क्षेत्र से प्राप्त मृदा-प्रतिदर्श
को वायु अथवा धूप में सुखाएं; यदि ढेले (clods) हों तो उन्हें लकड़ी के मैलेट व रबर
मूसल की सहायता से सावधानीपूर्वक तोड़ें, ताकि व्यक्तिगत कण न टूटें।
2.
प्रतिदर्श को 110 ±
5°C ताप पर ओवन में स्थिर भार (constant mass) प्राप्त होने तक शुष्क करें।
3.
क्वार्टरिंग विधि
(Quartering Method) द्वारा प्रतिनिधि (representative) प्रतिदर्श पृथक करें तथा उपरोक्त
तालिका अनुसार आवश्यक मात्रा तौलें, इसे W अंकित करें (कुल प्रतिदर्श भार)।
भाग-ब: स्थूल छलनी विश्लेषण (Coarse/Dry Sieve Analysis — 4.75 mm व
उससे बड़े कणों हेतु)
4.
आवश्यक छलनियों (100,
75, 19, 10, 4.75 mm) को साफ करें तथा घटते क्रम (सबसे बड़ी सबसे ऊपर) में एक के ऊपर
एक रखकर स्टैक बनाएं, सबसे नीचे पैन (pan) रखें।
5.
शुष्क प्रतिदर्श को सबसे
ऊपरी छलनी में डालें तथा ढक्कन लगाएं।
6.
स्टैक को यांत्रिक शेकर
पर रखकर कम-से-कम 10 मिनट तक हिलाएं। (सत्यापन हेतु: अतिरिक्त 1 मिनट हाथ से हिलाने
पर किसी भी छलनी से 1% से अधिक अतिरिक्त सामग्री न गुजरे, तभी छलनाई पूर्ण मानी जाएगी।)
7.
प्रत्येक छलनी पर रुकी
हुई मृदा को सावधानीपूर्वक अलग कर तौलें तथा अंकित करें।
भाग-स: महीन छलनी विश्लेषण (Fine/Wet Sieve Analysis — 4.75 mm से गुजरा
व 75 माइक्रोन पर रुका अंश हेतु)
8.
शुष्क प्रतिदर्श (जो
4.75 mm से गुजरा हो) को एक ट्रे में लेकर जल में भिगोएं तथा परिक्षेपक अभिकर्मक
(dispersing agent) मिलाकर 10–12 घंटे भीगने दें।
9.
भीगे हुए प्रतिदर्श को
4.75 mm छलनी पर जल की सहायता से धोएं, जब तक साफ जल न निकलने लगे। 4.75 mm पर रुके
अंश को 24 घंटे ओवन में शुष्क कर वापस स्थूल विश्लेषण में जोड़ें।
10.
4.75 mm से गुजरे अंश
को 75 माइक्रोन छलनी पर धोकर, महीन मृदा-कणों (silt/clay) को जल के साथ बहा दें, तथा
75 माइक्रोन पर रुके अंश को ओवन में शुष्क करें।
11.
इस शुष्क अंश को महीन
छलनियों (2 mm, 1 mm, 600μ, 425μ, 300μ, 212μ, 150μ, 75μ) के स्टैक में डालकर, यांत्रिक
शेकर पर कम-से-कम 10 मिनट तक हिलाएं।
12.
प्रत्येक छलनी पर रुकी
मृदा को अलग कर तौलें तथा अंकित करें। 75 माइक्रोन से गुजरा अंश (silt व clay) पैन
में एकत्रित होता है।
6. गणना — सूत्र (Calculation — Formula)
प्रत्येक छलनी पर रुकी मृदा का प्रतिशत = (उस छलनी पर रुका भार
/ कुल प्रतिदर्श भार W) × 100
संचयी रुका प्रतिशत (Cumulative % Retained) = उस छलनी तक के
सभी प्रतिशतों का योग
प्रतिशत गुजरा/फाइनर (% Finer) = 100 − संचयी रुका प्रतिशत
7. प्रेक्षण सारणी (Observation Table — प्रयोगशाला हेतु प्रारूप)
कुल प्रतिदर्श भार, W = _______ g
|
IS
छलनी आकार |
रुकी
मृदा का भार (g) |
रुका
प्रतिशत (%) |
संचयी
रुका प्रतिशत (%) |
गुजरा/फाइनर
प्रतिशत (%) |
|
10 mm |
|
|
|
|
|
4.75 mm |
|
|
|
|
|
2.36 mm |
|
|
|
|
|
1.18 mm |
|
|
|
|
|
600 माइक्रोन |
|
|
|
|
|
425 माइक्रोन |
|
|
|
|
|
300 माइक्रोन |
|
|
|
|
|
150 माइक्रोन |
|
|
|
|
|
75 माइक्रोन |
|
|
|
|
|
पैन (Pan) |
|
— |
— |
— |
8. कणीय आकार वितरण वक्र (Grading Curve — Graph)
प्राप्त आंकड़ों को अर्ध-लघुगणकीय ग्राफ (semi-log graph) पर आलेखित किया जाता
है — X-अक्ष (लघुगणकीय पैमाना) पर कणों का आकार D (mm), तथा Y-अक्ष (सामान्य पैमाना)
पर गुजरा प्रतिशत (Percentage Finer, 0 से 100 तक)। नीचे उदाहरण-स्वरूप एक विशिष्ट
(typical) कणीय आकार वितरण वक्र प्रदर्शित है —
(उपरोक्त ग्राफ केवल उदाहरण-स्वरूप है — वास्तविक प्रयोग में छात्र अपने प्रेक्षण सारणी के आंकड़ों से स्वयं वक्र आलेखित करेंगे।)
9. वक्र से गुणांकों की गणना (Coefficients from Grading
Curve)
वक्र से 10%, 30% व 60% फाइनर के संगत कणीय व्यास ज्ञात किए जाते हैं, जिन्हें
क्रमशः D₁₀, D₃₀ व D₆₀ कहते हैं (D₁₀ को "प्रभावी आकार"/Effective Size भी
कहा जाता है)।
एकरूपता गुणांक (Uniformity Coefficient), Cu = D₆₀ / D₁₀
वक्रता गुणांक (Coefficient of Curvature), Cc = (D₃₀)² /
(D₆₀ × D₁₀)
गणना का उदाहरण (Solved Example — ऊपर दिए ग्राफ के आधार पर)
वक्र से प्राप्त: D₁₀ = 0.175 mm, D₃₀ = 0.404 mm, D₆₀ = 1.035 mm
Cu = 1.035 / 0.175 = 5.91
Cc = (0.404)² / (1.035 × 0.175) = 0.90
10. मृदा वर्गीकरण मानदंड (Classification Criteria based
on Cu & Cc)
|
मृदा |
सुश्रेणित
(Well-Graded) हेतु शर्त |
कुश्रेणित
(Poorly-Graded) |
|
बजरी/कंकड़ (Gravel, GW) |
Cu > 4 तथा Cc, 1 से 3 के मध्य |
उपरोक्त शर्त पूर्ण न हो तो GP |
|
बालू (Sand, SW) |
Cu > 6 तथा Cc, 1 से 3 के मध्य |
उपरोक्त शर्त पूर्ण न हो तो SP |
उपरोक्त
उदाहरण में Cu = 5.91 (>4 परंतु सामान्यतः बालू हेतु आवश्यक >6 से कम) तथा
Cc = 0.90 (1–3 की परास से बाहर) है — अतः यह मृदा कुश्रेणित (poorly-graded, SP प्रकार
के निकट) मानी जाएगी। वास्तविक वर्गीकरण हेतु IS 1498 अनुसार पूर्ण विश्लेषण आवश्यक
है।
11. सावधानियां (Precautions)
●
मोर्टार-मूसल से ढेले
तोड़ते समय मृदा-कणों को स्वयं न तोड़ें, केवल आपस में चिपके कणों को पृथक करें।
●
प्रत्येक छलनी को उपयोग
से पूर्व व पश्चात भली-भांति साफ करें, ताकि कोई कण फंसा न रह जाए (विशेषकर महीन छलनियों
में)।
●
यांत्रिक शेकर पर छलनाई
की अवधि (न्यूनतम 10 मिनट) व तीव्रता (amplitude) निर्माता के निर्देशानुसार बनाए रखें।
●
प्रत्येक छलनी पर रुकी
मृदा को तौलते समय कोई भी कण हानि न हो, यह सुनिश्चित करें — कुल रुके भार का योग प्रारंभिक
प्रतिदर्श भार के निकटतम (1% विचलन के भीतर) होना चाहिए।
●
आर्द्र छलनी विश्लेषण
में जल-अपवाह के साथ महीन मृदा-कण (silt/clay) की हानि सामान्य है — इसका भार पैन में
गुजरे अंश के रूप में गणना में सम्मिलित किया जाता है।
●
मृत्तिका-लिपटे
(clay-coated) मृदा-कणों हेतु शुष्क छलनी विश्लेषण के स्थान पर आर्द्र छलनी विश्लेषण
अनिवार्य है, अन्यथा परिणाम अशुद्ध होंगे।
12. सिविल इंजीनियरिंग में महत्व (Engineering
Significance)
●
मृदा वर्गीकरण (Soil
Classification — USCS/IS 1498) की मूल आधारशिला — कणीय आकार वितरण के आधार पर मृदा
को बजरी, बालू, गाद, मृत्तिका आदि में वर्गीकृत किया जाता है।
●
सुश्रेणित
(well-graded) मृदा प्रॉक्टर संहनन में उच्चतर शुष्क घनत्व प्राप्त करती है — अतः तटबंध,
सड़क आधार व भरण (fill) सामग्री चयन में उपयोगी।
●
पारगम्यता
(permeability), निकास (drainage) व फिल्टर डिजाइन (filter design) — बांधों व भूमिगत
जल निकास प्रणालियों में उपयुक्त फिल्टर सामग्री के चयन हेतु आवश्यक।
●
ग्रेनुलर सब-बेस
(GSB), वेट मिक्स मैकाडम (WMM) जैसी सड़क निर्माण सामग्री की गुणवत्ता व MoRTH/IRC
विनिर्देशों (grading envelope) से अनुपालन की जांच।
●
संकेंद्रित फुटिंग व नींव
अभिकल्पन हेतु मृदा के अपरूपण सामर्थ्य (shear strength) व संपीडनशीलता
(compressibility) के प्रारंभिक अनुमान में सहायक।
अभ्यास हेतु प्रश्न: (1) IS 2720 (Part 4) के अनुसार छलनी विश्लेषण द्वारा कणीय आकार वितरण ज्ञात करने की संपूर्ण विधि (शुष्क व आर्द्र दोनों) सचित्र वर्णन कीजिए। (2) कणीय आकार वितरण वक्र किस प्रकार आलेखित किया जाता है? D₁₀, D₃₀, D₆₀ की परिभाषा दीजिए। (3) एकरूपता गुणांक (Cu) व वक्रता गुणांक (Cc) के सूत्र लिखिए तथा इनका महत्व समझाइए। (4) यदि D₁₀ = 0.2 mm, D₃₀ = 0.5 mm, D₆₀ = 1.2 mm हो, तो Cu व Cc ज्ञात कीजिए तथा मृदा सुश्रेणित है अथवा नहीं, बताइए। (5) सिविल इंजीनियरिंग में कणीय आकार वितरण के व्यावहारिक उपयोग पर टिप्पणी लिखिए।
No comments:
Post a Comment